GST Council की 57वीं बैठक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब सरकार 'GST 2.0' पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें सेंट्रलाइज्ड ऑडिट और टैक्स अपराधों के डीक्रिमिनलाइजेशन जैसे बड़े रिफॉर्म्स पर चर्चा की गई है।
एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स पर जोर
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 57वीं GST Council की बैठक में टैक्स पॉलिसी में बड़े बदलावों की नींव रखी गई है। 2025 में हुए रेट बदलावों के बाद, अब सरकार का फोकस 'GST 2.0' के जरिए प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और कॉर्पोरेट जगत पर से कंप्लायंस का बोझ कम करने पर है।
सेंट्रलाइज्ड ऑडिट का प्रस्ताव
फिलहाल, मल्टी-स्टेट ऑपरेशंस वाली कंपनियों को हर राज्य में अलग-अलग ऑडिट का सामना करना पड़ता है, जिससे न केवल समय बर्बाद होता है बल्कि लागत भी बढ़ती है। Council अब एक ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जिसमें PAN-आधारित एक साझा मास्टर फाइल का उपयोग होगा। इससे ऑडिट प्रक्रिया सेंट्रलाइज्ड हो जाएगी और कंपनियों को बार-बार टैक्स डिपार्टमेंट के सवालों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अरेस्ट के नियमों में ढील और राहत
इंडस्ट्री की पुरानी मांग को मानते हुए, काउंसिल ने टैक्स अपराधों के डीक्रिमिनलाइजेशन पर विचार शुरू कर दिया है। सरकार अब प्रॉसीक्यूशन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने पर विचार कर रही है। साथ ही, गिरफ्तारी के लिए अनिवार्य न्यायिक निगरानी का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि प्रशासनिक सख्ती के नाम पर होने वाले उत्पीड़न को रोका जा सके।
छोटे व्यापारियों के लिए आसान नियम
ई-कॉमर्स और छोटे विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। छोटे ई-कॉमर्स सेलर्स को अब प्लेटफॉर्म वेयरहाउस के जरिए रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिल सकती है, जिससे लॉजिस्टिक्स और डिजिटल रिटेल को बड़ी गति मिलेगी।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
हालांकि ये रिफॉर्म्स बिजनेस फ्रेंडली हैं, लेकिन निवेशकों को इनके लागू होने की गति पर नजर रखनी चाहिए। ये अभी केवल पॉलिसी प्रपोजल हैं। इसका असली असर सरकारी नोटिफिकेशन और GST पोर्टल के अपडेट के बाद ही दिखेगा। सरकार के सामने चुनौती यह है कि 'ट्रस्ट-बेस्ड' सिस्टम बनाने के साथ ही टैक्स चोरी और फ्रॉड पर भी लगाम कसकर रखी जाए।
