GST Council 7 अक्टूबर, 2026 को 'GST 2.0' पर चर्चा के लिए बैठक करेगी। इसमें रिफंड के लिए **10** दिन की समय-सीमा, प्रोसीक्यूशन की सीमा को बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने जैसे अहम प्रस्तावों पर फैसला हो सकता है।
सरकार अब जीएसटी प्रक्रिया को और सरल बनाने की तैयारी में है। 7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली GST Council की बैठक में 'GST 2.0' फ्रेमवर्क के तहत एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ कम करने पर जोर दिया जाएगा।
रिफंड और कंप्लायंस में बड़ी राहत
सरकार का मुख्य लक्ष्य कंपनियों का वर्किंग कैपिटल जो टैक्स सिस्टम में फंस जाता है, उसे बाहर निकालना है। प्रस्ताव के अनुसार, रिफंड एप्लिकेशन के लिए 10 दिन का सख्त समय तय किया जा सकता है। ऑटोमेटेड सिस्टम आने से एक्सपोर्टर्स और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, प्लांट और मशीनरी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा मिलने से एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
डिक्रिमिनलाइजेशन और न्यायिक निगरानी
सरकार टैक्स विवादों को कम करने के लिए प्रोसीक्यूशन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने पर विचार कर रही है। इसके अलावा, टैक्स अधिकारियों से गिरफ्तारी के अधिकार को हटाकर इसे न्यायिक निगरानी (Judicial Oversight) में लाने की योजना है, जिससे कारोबारियों के बीच उत्पीड़न का डर कम होगा। लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए भी ट्रकों की बार-बार चेकिंग बंद कर केवल ओरिजिन और डेस्टिनेशन पॉइंट पर ही चेकिंग सीमित करने पर चर्चा हो सकती है।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि ये सुधार बिजनेस के लिहाज से अच्छे हैं, लेकिन रिफंड प्रोसेस को पूरी तरह ऑटोमेट करने से फ्रॉड और ITC स्कैम का जोखिम बढ़ सकता है। सरकार को इसके लिए पुख्ता टेक्नोलॉजी-आधारित सुरक्षा कवच तैयार करने होंगे। साथ ही, राज्यों के रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर को भी बैलेंस करना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों की नजर इस बैठक के नतीजों पर टिकी है कि कौन से प्रस्ताव तुरंत लागू होते हैं।
