GIFT Nifty: बाजार खुलने का 'अलार्म', कैसे तय होती है भारतीय शेयर बाजार की चाल?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
GIFT Nifty: बाजार खुलने का 'अलार्म', कैसे तय होती है भारतीय शेयर बाजार की चाल?

2023 में सिंगापुर कॉन्ट्रैक्ट की जगह लेने के बाद से, GIFT Nifty अब भारतीय इक्विटी के लिए सबसे अहम प्री-मार्केट इंडिकेटर बन चुका है। डॉलर-सेटलमेंट और लंबे ट्रेडिंग घंटों के कारण, यह निवेशकों को घरेलू बाजार खुलने से पहले ग्लोबल सेंटीमेंट समझने में मदद करता है।

जुलाई 2023 में सिंगापुर से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) में डेरिवेटिव ट्रेडिंग शिफ्ट होने के बाद से GIFT Nifty एक अनिवार्य टूल बन गया है। Nifty 50 को ट्रैक करने वाले निवेशकों के लिए यह एक ऐसे थर्मामीटर की तरह काम करता है, जो रात भर के ग्लोबल संकेतों का असर पहले ही बता देता है। भारत ने इसे अपने रेगुलेटरी दायरे में लाकर अपनी लिक्विडिटी पर पकड़ मजबूत की है।

गुजरात में डेरिवेटिव ट्रेड का नया केंद्र

GIFT City में इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल इंस्टीट्यूशंस के लिए ट्रेडिंग को आसान बनाना था। International Financial Services Centres Authority (IFSCA) की निगरानी में, यहाँ का इकोसिस्टम बेहद टैक्स-फ्रेंडली है। यहाँ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जैसी लेवी से छूट मिलती है। डॉलर में सेटलमेंट होने के कारण इंटरनेशनल फंड्स के लिए रिस्क हेजिंग करना काफी आसान हो गया है। मार्च 2026 तक इस एक्सचेंज का मासिक टर्नओवर $129.80 बिलियन के आंकड़े को पार कर चुका है।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज के साथ रणनीतिक साझेदारी

NSE IX अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। अक्टूबर 2026 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज के साथ हुआ समझौता इसके ग्लोबल विस्तार की कहानी कहता है। इस पार्टनरशिप का मकसद क्रॉस-बॉर्डर लिस्टिंग और नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करना है, ताकि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर खड़ा हो सके।

संकेतों पर रखें नजर, लेकिन रहें सतर्क

GIFT Nifty भले ही मार्केट की ओपनिंग का संकेत देता हो, लेकिन इसे निवेश का अंतिम पैमाना न मानें। यह प्लेटफॉर्म 2:45 AM IST तक काम करता है, इसलिए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव इसे तुरंत प्रभावित करते हैं। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि एशियाई या अमेरिकी बाजारों में गिरावट अक्सर भारतीय बाजारों में गैप-डाउन ओपनिंग का कारण बनती है। USD-INR की चाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) का आउटफ्लो ऐसे कारक हैं जो बाजार की दिशा को किसी भी वक्त बदल सकते हैं, इसलिए सावधानी ही निवेश की कुंजी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.