GIFT City का नया अवतार: 'Investment Tourism' के जरिए खुलेगा ग्लोबल मार्केट का रास्ता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GIFT City का नया अवतार: 'Investment Tourism' के जरिए खुलेगा ग्लोबल मार्केट का रास्ता

GIFT City अब एक दोतरफा फाइनेंशियल कॉरिडोर (Two-way financial corridor) में बदल रहा है। 'इन्वेस्टमेंट टूरिज्म' के कॉन्सेप्ट के साथ, यह हब भारतीय और ग्लोबल मार्केट्स को जोड़ने के साथ ही क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल फ्लो को आसान बनाने की तैयारी में है।

GIFT City, जो भारत का प्रमुख इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) है, अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। अब तक इसे केवल बाहर पैसा भेजने वाले एक जोन के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब यह एक 'bidirectional gateway' के रूप में उभर रहा है।

दोतरफा फाइनेंशियल पुल की तैयारी

इंडिया INX जैसे बड़े संस्थानों के साथ मिलकर अधिकारी एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं, जहाँ सीमाओं के पार निवेश की प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित हो। इसका मुख्य लक्ष्य ऑफशोर (Offshore) निवेश से जुड़े पुराने भरोसे के संकट को खत्म करना और घरेलू निगरानी (Domestic oversight) के तहत निवेश की सुविधा देना है।

इस बदलाव में ViewTrade Holding Corporation जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं। ये कंपनियां क्रॉस-बॉर्डर क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट तक पहुँचने में तकनीकी अड़चनें न आएं। अब KYC प्रोसेस को आसान बनाने और ड्यूल-लिस्टिंग (Dual-listing) के नियम स्पष्ट करने पर जोर दिया जा रहा है।

निवेशकों के लिए क्या हैं फायदे और रिस्क?

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि वे अब बिना किसी जटिल विदेशी प्लेटफॉर्म के अपने पोर्टफोलियो को ग्लोबल एसेट्स में डाइवर्सिफाई कर पाएंगे। IFSC के दायरे में रहने से निवेशकों को घरेलू कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी।

हालाँकि, यहाँ कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • रेगुलेटरी बदलाव: IFSC के नियम अभी भी विकसित हो रहे हैं, इसलिए प्रोडक्ट की पात्रता और निवेश की लिमिट में भविष्य में बदलाव संभव है।
  • टैक्स की जटिलता: भारतीय टैक्स कानून और विदेशी एसेट वाले देश के नियमों के बीच सामंजस्य बिठाना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • बाजार का जोखिम: भले ही निवेश आसान हो जाए, लेकिन करेंसी में उतार-चढ़ाव (Currency volatility) और इंटरनेशनल एसेट प्राइसेस में आने वाली गिरावट जैसे रिस्क हमेशा बने रहेंगे।

अगले चरण में International Financial Services Centres Authority (IFSCA) की भूमिका अहम होगी, क्योंकि वे इक्विटी लिस्टिंग और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए जो नए नियम बनाएंगे, वही तय करेंगे कि 'इन्वेस्टमेंट टूरिज्म' का यह मॉडल कितनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.