GIFT City के IFSC में निवेश का सिलसिला तेजी से बढ़ा है। जून **2026** तक कुल फंड कमिटमेंट बढ़कर **$45.08 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भारी उछाल देखा गया है।
GIFT City का इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) नई ऊंचाईयां छू रहा है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में कुल फंड कमिटमेंट का आंकड़ा मार्च के $39.09 बिलियन से बढ़कर $45.08 बिलियन हो गया है। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) के आंकड़ों के मुताबिक, यह हब अब सिर्फ बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम निवेशकों का भी पसंदीदा बनता जा रहा है।
रिटेल निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी
इस तिमाही में रिटेल भागीदारी दोगुनी हो गई है। IFSC स्कीमों में कुल निवेशकों की संख्या पिछले तिमाही के 9,594 से बढ़कर 16,150 पर पहुंच गई है। रिटेल-स्पेसिफिक स्कीमों में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई है। ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर्स (GAPs) की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जो भारतीय निवेशकों को विदेशी बाजारों में निवेश करने का मौका दे रहे हैं।
बढ़ता इंस्टीट्यूशनल बेस
IFSC का इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तार कर रहा है। रजिस्टर्ड फंड मैनेजमेंट एंटिटीज (FMEs) की संख्या 217 से बढ़कर 235 हो गई है। कुल 401 फंड और स्कीमों के साथ, यह सेंटर अब अलग-अलग प्रोफाइल वाले निवेशकों के लिए कई तरह के प्रोडक्ट पेश कर रहा है।
क्या हैं निवेश के जोखिम?
विदेशी बाजारों में निवेश का मौका अच्छा है, लेकिन कुछ रिस्क भी हैं जिन्हें समझना जरूरी है:
- करेंसी रिस्क (Currency Risk): IFSC में ज्यादातर निवेश डॉलर में होते हैं। रुपये और डॉलर की कीमतों में बदलाव आपके रिटर्न पर असर डाल सकता है।
- रेगुलेटरी फर्क: यहाँ के नियम घरेलू म्यूचुअल फंड से अलग हो सकते हैं। इसलिए एग्जिट लोड और लिक्विडिटी की शर्तों को ध्यान से समझें।
- लिक्विडिटी: बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान पैसा निकालने में कुछ स्कीमों में दिक्कत हो सकती है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार नई स्कीमों और नियमों में हो रहे बदलावों पर नजर बनाए रखें।
