वित्त मंत्रालय ने GST रिटर्न फॉर्म्स में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। इसका मकसद टैक्स मिसमैच को कम करना और ऑडिट प्रोसेस को आसान बनाना है। ड्राफ्ट फॉर्म्स पर पब्लिक फीडबैक **1 नवंबर 2026** से शुरू होगा और इसे **1 अप्रैल 2027** तक पूरी तरह लागू किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय और Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) अब GST फाइलिंग को पूरी तरह से स्ट्रीमलाइन करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स लायबिलिटी और Input Tax Credit (ITC) के बीच होने वाली विसंगतियों को दूर करना है। \n\n### क्या होगा नया?\n\nसरकार GSTR-1, GSTR-1A और Invoice Furnishing Facility (IFF) को सीधे GSTR-3B के साथ अलाइन करेगी। इससे रिपोर्टिंग में होने वाली गलतियां कम होंगी, जो अक्सर ऑटोमेटेड टैक्स नोटिस का कारण बनती हैं। इसके अलावा, नए फ्रेमवर्क में Rule 86D को जोड़ा जा रहा है, जो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत टैक्स पेमेंट के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट तैयार करेगा। \n\n### ऑडिट प्रोसेस में भी राहत\n\nफिलहाल, अलग-अलग राज्यों में काम करने वाली कंपनियों को हर जूरिडिक्शन में अलग ऑडिट का सामना करना पड़ता है, जो काफी थकाऊ होता है। सरकार अब इस ऑडिट फ्रेमवर्क की समीक्षा कर रही है ताकि इसे और अधिक सहज बनाया जा सके। \n\n1 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक MyGov पोर्टल पर इंडस्ट्री के सुझाव मांगे जाएंगे। यह बदलाव कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) के खर्च और समय को घटाने में मददगार साबित होगा।
