वित्त मंत्रालय अब Central GST (CGST) टैक्सपेयर्स के लिए 'फेसलेस असेसमेंट' सिस्टम ला रहा है। इसमें फिजिकल मीटिंग्स की जगह डिजिटल और AI-आधारित रिव्यू होगा, जिससे टैक्स डिस्प्यूट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी।
वित्त मंत्रालय और Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) अब इनडायरेक्ट टैक्स इकोसिस्टम को पूरी तरह से मॉडर्न बनाने की तैयारी में हैं। अगले 3 से 4 महीने में इसका पायलट प्रोग्राम शुरू होने की उम्मीद है। इस बदलाव के बाद, अब टैक्सपेयर्स को दफ्तरों के चक्कर लगाने या आमने-सामने सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरा सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटेड और रैंडमाइज्ड होगा, ताकि किसी भी तरह के पक्षपात या मनमाने फैसलों को रोका जा सके।
नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?
यह ढांचा इनकम टैक्स विभाग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'फेसलेस असेसमेंट' मॉडल जैसा ही होगा। डेटा एनालिटिक्स और AI का इस्तेमाल करते हुए, टैक्स मामलों को देश के किसी भी कोने में बैठे अधिकारी को अलॉट किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर आप किसी एक राज्य में हैं, तो आपके केस की जांच कहीं और की टीम करेगी। नोटिस से लेकर सुनवाई तक सब कुछ डिजिटल होगा और इसका एक परमानेंट रिकॉर्ड रखा जाएगा।
फिलहाल यह सेंट्रल जूरिडिक्शन वाले 73.5 लाख टैक्सपेयर्स पर लागू होगा। इसमें मुख्य रूप से बड़े मैन्युफैक्चरर्स, एक्सपोर्टर्स और मल्टी-स्टेट ऑपरेशंस वाली कंपनियां शामिल होंगी। चूंकि यह बदलाव केंद्र के दायरे में है, इसलिए इसके लिए GST काउंसिल की मंजूरी की तुरंत आवश्यकता नहीं है।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव रातों-रात असरदार नहीं होगा। शुरुआती दौर में कुछ तकनीकी और ऑपरेशनल दिक्कतें आ सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता 'लोकल बिजनेस कॉन्टेक्स्ट' को लेकर है। पहले लोकल ऑफिसर्स को इलाके के बिजनेस की बारीकियों की जानकारी होती थी, लेकिन अब सेंट्रलाइज्ड टीम के पास शायद वो समझ न हो। इसके अलावा, IT इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती भी కీలकी होगी, क्योंकि सिस्टम में तकनीकी खराबी या डेटा सिंक्रोनाइजेशन में देरी से कामकाज अटक सकता है। कंपनियों को अब अपने इंटरनल ऑडिट ट्रेल और डॉक्यूमेंटेशन को बेहद मजबूत रखना होगा ताकि पेपरलेस जांच के दौरान कोई परेशानी न आए।
