BSE की बल्ले-बल्ले! FTSE Russell ने दी हरी झंडी, ₹4,900 करोड़ के निवेश का रास्ता खुला

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AuthorAditya Rao|Published at:
BSE की बल्ले-बल्ले! FTSE Russell ने दी हरी झंडी, ₹4,900 करोड़ के निवेश का रास्ता खुला

भारतीय शेयर बाज़ार के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है! ग्लोबल इंडेक्स प्रोव्हायडर FTSE Russell ने BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) को अपने ग्लोबल इक्विटी इंडेक्स के लिए पात्र एक्सचेंज (Eligible Exchange) घोषित कर दिया है। इस फैसले से मार्च 2027 से BSE पर लिस्टेड कंपनियों में करीब **$695 मिलियन** यानी लगभग **₹4,900 करोड़** के पैसिव फंड इनफ्लो (Passive Fund Inflows) आने की उम्मीद है।

BSE पर लिस्टिंग का बढ़ा महत्व

FTSE Russell के इस फैसले के बाद, अब BSE पर लिस्टेड स्टॉक्स को उनके ग्लोबल बेंचमार्क इंडेक्स में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह भारतीय निवेशकों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि इससे BSE पर लिस्टेड कंपनियों की ग्लोबल पहचान बढ़ेगी और ज़्यादा कैपिटल (Capital) इन कंपनियों में निवेश हो सकता है।

नए IPOs को मिलेगा बूस्ट

Nuvama के मार्केट एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस फैसले से BSE पर लिस्टेड शेयरों में $695 मिलियन (लगभग ₹4,900 करोड़) का पैसिव फंड इनफ्लो आ सकता है। इसके अलावा, यह नए IPOs (Initial Public Offerings) के लिए भी प्रक्रिया को आसान बनाएगा। जो कंपनियां BSE के मेन बोर्ड पर लिस्ट होंगी, वे अगर साइज़ (Size) और लिक्विडिटी (Liquidity) के ज़रूरी पैमानों पर खरी उतरती हैं, तो उन्हें ग्लोबल इंडेक्स में तेज़ी से शामिल किया जा सकेगा।

NSE को प्राथमिकता जारी

हालांकि, एक खास बात पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर कोई कंपनी BSE और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) दोनों पर लिस्टेड है, तो FTSE Russell इंडेक्स में शामिल करने के लिए NSE पर लिस्टेड सिक्योरिटी (Security) को ही प्राथमिकता देगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि फिलहाल NSE पर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन (International Institutional Participation) और लिक्विडिटी (Liquidity) ज़्यादा है।

रेगुलेटरी चुनौतियां और स्टॉक में गिरावट

इंडेक्स में शामिल होने की यह खबर BSE के लिए अच्छी है, लेकिन हाल के दिनों में BSE के स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। एक्सचेंज को कई रेगुलेटरी और स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और RBI के बैंक गारंटी नियमों में बदलाव से ट्रांजेक्शन-रेवेन्यू (Transaction-linked revenue) और ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational costs) को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इन चिंताओं और बाज़ार में आई करेक्शन (Market Corrections) के चलते, Jefferies और Nuvama जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने हाल ही में BSE के स्टॉक पर अपनी रेटिंग्स (Ratings) को डाउनग्रेड (Downgrade) किया है। निवेशकों को यह देखना होगा कि एक्सचेंज इन रेगुलेटरी बदलावों से कैसे निपटता है और क्या पैसिव इनफ्लो (Passive Inflows) मार्जिन प्रेशर (Margin Pressures) को कम करने में मदद करता है। मार्च 2027 की समीक्षा इस नई पात्रता के तहत कंपनियों के लिए पहली बड़ी मील का पत्थर साबित होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.