ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर FTSE Russell ने अब BSE को अपने ग्लोबल इंडेक्स के लिए पात्र बना दिया है। मार्च 2027 से लागू होने वाले इस फैसले से NSE के **₹30,000 करोड़** के आगामी IPO के लिए ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।
ग्लोबल बेंचमार्क और भारत का कनेक्शन
FTSE Russell के इस कदम ने भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। अब तक बड़ी भारतीय कंपनियां मुख्य रूप से NSE की मौजूदगी के दम पर इन इंडेक्स में शामिल होती थीं, लेकिन BSE के पात्र होने से अब उन कंपनियों के लिए भी रास्ता खुल गया है जो विशेष रूप से BSE पर लिस्टेड हैं। यह बदलाव मार्च 2027 की समीक्षा के साथ प्रभावी होगा।
NSE IPO पर असर
यह निर्णय NSE के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। SEBI की मंजूरी के बाद NSE अपना ₹30,000 करोड़ का IPO लाने की तैयारी में है। चूंकि NSE ने अपने शेयरों को BSE प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने की योजना बनाई है, इसलिए FTSE Russell की यह नई पात्रता NSE के स्टॉक को भविष्य में ग्लोबल बेंचमार्क में शामिल होने का अवसर देती है।
पैसिव निवेश का गणित
इंडेक्स में शामिल होने का सबसे बड़ा फायदा 'पैसिव कैपिटल इनफ्लो' के रूप में मिलता है। दुनिया भर के कई बड़े फंड्स इंडेक्स-लिंक्ड होते हैं, जो बेंचमार्क में शामिल कंपनियों में ऑटोमैटिक निवेश करते हैं। इससे किसी भी नई लिस्टेड कंपनी को ग्लोबल संस्थागत निवेशकों का मजबूत आधार मिलता है।
क्या है चुनौतियां?
इंडेक्स में शामिल होना इतना आसान नहीं है। इसके लिए कंपनी को कम से कम 6 महीने का ट्रेडिंग इतिहास और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शेयरों की संख्या (Public Float) जैसे सख्त मानकों को पूरा करना होता है। साथ ही, निवेशकों को कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन और मार्केट सेंटीमेंट पर भी नजर रखनी होगी। BSE पर हालिया रेगुलेटरी जांच और एक्सचेंज के डेरिवेटिव सेटलमेंट से जुड़े सवालों के बीच, ग्लोबल निवेशकों का भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
