FSSAI ने अब बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे Amazon, Flipkart, Swiggy Instamart, Zepto और BigBasket के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन कंपनियों पर गलत लेबलिंग और फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन का आरोप है, जिससे अब क्विक-कॉमर्स सेक्टर में सख्ती बढ़ने वाली है।
नियम तोड़ने पर रेगुलेटर की सख्ती
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रेगुलेटर इन कंपनियों पर 'Food Safety and Standards Act, 2006' के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। मामला मुख्य रूप से उन प्रोडक्ट्स का है, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे मिस-ब्रांडेड हैं या सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।
बिचौलियों की अब खैर नहीं
अब तक ये डिजिटल मार्केटप्लेस सिर्फ एक बिचौलिए (Intermediary) के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन FSSAI ने अब इन्हें सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराना शुरू कर दिया है। रेगुलेटर ने Happilo और Milky Mist जैसे ब्रांडों के कुछ खास प्रोडक्ट्स पर सवाल उठाए हैं। इनमें 'Greek Yoghurt' और 'Low-fat cream' जैसे आइटम शामिल हैं, जिनमें भ्रामक न्यूट्रिशनल दावे किए गए थे।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
इन्वेस्टर्स के लिए चिंता की बात यह है कि अब इन कंपनियों को अपने ऑपरेशंस में काफी बदलाव करने पड़ेंगे। क्विक-कॉमर्स का पूरा मॉडल 'तेजी' पर टिका है, लेकिन अब कंपनियों को वेंडर वेरिफिकेशन और क्वालिटी चेक पर ज्यादा समय और पैसा खर्च करना होगा।
इस 'Growth-at-any-cost' वाले मॉडल के लिए यह एक बड़ा झटका है। अगर कंपनियों को ज्यादा जांच-पड़ताल करनी पड़ी, तो इससे उनकी डिलीवरी स्पीड पर असर पड़ सकता है और कंप्लायंस लागत बढ़ने से मार्जिन पर भी दबाव दिखेगा। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि ये कंपनियां इन कानूनी अड़चनों से कैसे निपटती हैं और क्या वे भविष्य में होने वाले पेनल्टी के जोखिम को टाल पाती हैं।
