FSSAI देशभर में 'Analogue Paneer' (नकली पनीर) पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही स्कूलों के पास हाई-फैट और शुगर वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को भी सीमित किया जाएगा।
नकली पनीर पर लगाम
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) अब पूरे देश में 'Analogue Paneer' के उत्पादन और बिक्री को रोकने के लिए एक नेशनल पॉलिसी ला रहा है। यह सिंथेटिक उत्पाद, जिसे अक्सर दूध के ठोस पदार्थों की जगह वेजिटेबल फैट मिलाकर बनाया जाता है, पहले से ही महाराष्ट्र, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में प्रतिबंधित है। इस कदम से संगठित डेयरी क्षेत्र को फायदा हो सकता है, क्योंकि मार्केट में असली दूध से बने पनीर की मांग बढ़ेगी और अनऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स पर लगाम लगेगी।
स्कूलों के पास जंक फूड पर पाबंदी
FSSAI केवल डेयरी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों के आसपास हाई-फैट, शुगर और साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को भी नियंत्रित करने की योजना बना रहा है। यह बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए किया गया एक बड़ा कदम है। पैकेट पर 'रेड हेक्सागोनल' (Red Hexagonal) वार्निंग लेबल लगाने के नियम से FMCG कंपनियों को अपने उत्पादों की न्यूट्रिशन वैल्यू में बदलाव करना पड़ सकता है।
डिजिटल कॉमर्स में पारदर्शिता
FSSAI अब क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी सख्त है। कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने डिजिटल इंटरफेस पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को साफ-साफ दिखाएं। Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स पहले ही इस दिशा में कदम उठाते हुए उन उत्पादों को हटा रहे हैं जिनमें सिंथेटिक डेयरी का इस्तेमाल होता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को अब कंपनियों के अनुपालन (Compliance) खर्च पर नजर रखनी चाहिए। नई गाइडलाइन्स से छोटी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जबकि बड़ी और संगठित कंपनियों के लिए यह एक 'एंट्री बैरियर' की तरह काम करेगा, जिससे उनकी क्वालिटी और मार्केट शेयर मजबूत होने की उम्मीद है।
