भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPIs) की निकासी का सिलसिला जारी है। अक्टूबर में FPIs ने बाजार से **₹52,100 करोड़** निकाले हैं, जिससे साल **2026** की कुल निकासी **₹3.12 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों का बिकवाली का दबाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2025 की कुल ₹1.66 ट्रिलियन की निकासी से कहीं ज्यादा है, जो ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।
क्यों हो रही है इतनी बिकवाली?
इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह US बॉन्ड यील्ड में आई उछाल है। जब अमेरिका में सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो ग्लोबल निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां निवेश करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने भी भारतीय निवेश को थोड़ा कम आकर्षक बना दिया है। हालांकि US 10-year बॉन्ड यील्ड अपने 5.3% के पीक से गिरकर अब 5.08% के करीब है, लेकिन स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
इसके अलावा, नॉर्थ एशियन मार्केट्स में AI-driven रैली की वजह से वहां ग्लोबल फंड मैनेजर्स का ध्यान ज्यादा है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने भी सेंटीमेंट पर असर डाला है, क्योंकि इससे भारत के इंपोर्ट बिल पर सीधा दबाव पड़ता है।
निवेशक कहां कर रहे हैं बिकवाली?
विदेशी निवेशक फिलहाल फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी सेक्टर से अपना एक्सपोजर कम कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, रेस्टोरेंट चेन और हेल्थकेयर जैसे कंज्यूमर-सेंट्रिक सेक्टर्स में विदेशी दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है, क्योंकि इन्हें हाई-इंटरेस्ट रेट के दौर में भी सुरक्षित माना जाता है।
अब आगे क्या?
लोकल निवेशकों की नजर अब फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजों (Q2 Results) पर टिकी है। अगर कंपनियों के मार्जिन्स और प्रॉफिट में मजबूती दिखती है, तो बाजार के सेंटीमेंट को संभलने में मदद मिल सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों की अर्निंग्स पर लगातार नजर रखें।
