अक्टूबर के पहले पखवाड़े में Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से **₹47,955 करोड़** की भारी निकासी की है। हालांकि, बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच IT सेक्टर ने सबको चौंकाते हुए **₹2,599 करोड़** का नया निवेश आकर्षित किया है।
बाजार से बाहर क्यों निकल रहा पैसा?
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (NSDL) के डेटा के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों का मूड काफी संभलकर चलने वाला रहा है। यह निकासी सितंबर के दूसरे पखवाड़े में हुई ₹21,745 करोड़ की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।
किन सेक्टरों से हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
बाजार में बिकवाली का आलम यह है कि ट्रैक किए जाने वाले 24 प्रमुख सेक्टरों में से 19 में FPIs ने बिकवाली की है। सबसे ज्यादा मार फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर पड़ी है, जहां से ₹8,634 करोड़ बाहर निकाले गए। इसके बाद हेल्थकेयर सेक्टर का नंबर आता है, जहां निवेशकों ने ₹5,497 करोड़ की निकासी की, जो कई महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है। ऑटो और FMCG जैसे सेक्टर भी विदेशी निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग के दबाव में दिखे।
IT सेक्टर में क्यों है चमक?
बाजार की इस अफरा-तफरी के बीच IT सेक्टर ने अपना दबदबा कायम रखा है। जहां बाकी सेक्टरों से पैसा निकल रहा है, वहीं IT शेयरों में ₹2,599 करोड़ का ताजा निवेश आया है। इसका असर Nifty IT इंडेक्स पर भी दिखा है, जो अक्टूबर के पहले आधे हिस्से में 10.88% तक उछला है, जबकि बेंचमार्क Nifty केवल 1.67% की बढ़त बना सका।
निवेशकों की रणनीति क्या है?
यह बड़े स्तर पर हो रही बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर बढ़ते अनिश्चितता के माहौल ('Risk-off' environment) के कारण है। जानकार इसे पूरी तरह से एग्जिट नहीं, बल्कि रणनीति में बदलाव मान रहे हैं। निवेशक अधिक वैल्यूएशन वाले सेक्टरों से पैसा निकालकर उन सेक्टरों में लगा रहे हैं जहां स्थिरता और ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या FPIs की यह बिकवाली जारी रहती है या बाजार में फिर से स्थिरता लौटती है।
