FPIs ने अक्टूबर में अपनी निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। विदेशी निवेशकों ने IT शेयरों में **₹2,599 करोड़** का निवेश किया है, जबकि हेल्थकेयर सेक्टर से **₹5,497 करोड़** के शेयर बेचे हैं। यह हलचल ऐसे समय में देखी गई है जब ग्लोबल दबाव के चलते भारतीय बाजारों से कुल निकासी **₹50,000 करोड़** के पार निकल चुकी है।
IT सेक्टर में निवेश की वापसी
लगातार तीन महीनों तक हेल्थकेयर पर दांव लगाने के बाद अब FPIs का रुख IT कंपनियों की ओर मुड़ गया है। Nifty IT इंडेक्स में हाल के महीनों में 10.88% की तेजी देखी गई है। निवेशकों को लुभाने वाली सबसे बड़ी वजह इसका वैल्युएशन है। वर्तमान में IT स्टॉक्स अपनी अनुमानित कमाई के 18 गुने (18 times) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो कि 23 गुने के 5-वर्षीय औसत से काफी कम है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी प्राइसिंग चुनौतियां अगले फाइनेंशियल ईयर में मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
हेल्थकेयर सेक्टर में क्यों मची बिकवाली?
हेल्थकेयर सेक्टर, जो पिछले तीन महीनों में ₹15,779 करोड़ का इनफ्लो देख चुका था, वहां अब सेंटीमेंट पूरी तरह बदल गया है। इस बिकवाली के पीछे मुख्य कारण सरकारी रेगुलेशंस हैं। सरकार द्वारा नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं की कीमतों पर लगाई गई सीमा (Price Cap) ने हॉस्पिटल चेन्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि अब एनालिस्ट्स हॉस्पिटल नेटवर्क के बजाय डायग्नोस्टिक्स और फार्मेसी जैसे डिफेंसिव व्यवसायों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
बाजार पर ग्लोबल दबाव का असर
ये सेक्टर-स्पेसिफिक मूव्स ऐसे समय में हो रहे हैं जब भारतीय बाजार चौतरफा दबाव से जूझ रहे हैं। अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशकों ने ₹50,000 करोड़ से अधिक की निकासी की है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, डॉलर का दबदबा और US बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इमर्जिंग मार्केट्स के आकर्षण को कम कर दिया है, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अब निवेशकों की नजर ग्लोबल ब्याज दरों और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी है।
