अगस्त 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयरों में **₹30,919 करोड़** का निवेश किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब विदेशी निवेशक नेट बायर (net buyer) बने हैं, हालांकि साल 2026 के कुल आंकड़ों को देखें तो वे अभी भी बिकवाली के मोड में हैं।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटता दिख रहा है। मार्च से जून 2026 तक जारी रही चार महीने की लंबी बिकवाली के बाद, अगस्त में FPIs ने दमदार खरीदारी की है। इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय कंपनियों का शानदार प्रदर्शन है।
मुनाफे की रफ्तार और मार्केट सेंटीमेंट
Nifty 50 कंपनियों ने जून 2026 की तिमाही (Q1FY27) में 18% का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले 10 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, ग्लोबल निवेशकों ने नॉर्थ एशियन मार्केट्स के ओवरक्राउडेड AI ट्रेड्स से अपना पैसा निकालकर भारत की ओर रुख किया है। साथ ही, भारतीय रुपये में स्थिरता ने भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद की है।
महीने के अंत में क्यों हुई बिकवाली?
अगस्त के आखिरी दिन, यानी 31 अगस्त 2026 को FPIs ने ₹7,986 करोड़ की बिकवाली की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के जरिए इंडेक्स रिबैलेंसिंग के कारण आई, जो कि एक तकनीकी प्रक्रिया थी।
क्या है बड़ा रिस्क?
भले ही अगस्त का महीना अच्छा रहा हो, लेकिन साल 2026 के ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो FPIs अब भी ₹2.23 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच Domestic Institutional Investors (DIIs) ने 'मार्केट स्टेबलाइजर' की भूमिका निभाते हुए बाजार को संभाले रखा है।
आने वाले समय में कच्चा तेल (Crude oil) की कीमतों में उछाल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और ग्लोबल ब्याज दरों के संकेत यह तय करेंगे कि FPIs की यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं। ऊंचे वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशक अभी भी काफी सिलेक्टिव अप्रोच अपना रहे हैं।
