अगस्त 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयरों में **₹23,500 करोड़** से अधिक का निवेश किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब विदेशी पैसा भारतीय बाजार में लौट रहा है।
बाजार में क्या बदल गया?
विदेशी निवेशक (FPIs) अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं। अगस्त में ₹23,500 करोड़ का निवेश इस बात का संकेत है कि ग्लोबल फंड्स अब कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में 'ओवरहीटेड' टेक और सेमीकंडक्टर चिप्स शेयरों से अपना पैसा निकालकर भारत की ओर रुख कर रहे हैं।
क्यों लौट रहे हैं निवेशक?
इस वापसी के पीछे कई बड़े कारण हैं। अमेरिका में संभावित ब्याज दरों में कटौती (Interest Rate Cuts) की उम्मीदों ने उभरते बाजारों के लिए रिस्क लेने की क्षमता बढ़ा दी है। इसके अलावा, भारतीय रुपये में स्थिरता और घरेलू कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने ग्लोबल फंड मैनेजर्स का भरोसा फिर से बहाल किया है। यह केवल एक सेंटीमेंट नहीं, बल्कि एक टैक्टिकल रोटेशन है, जहां निवेशक अब महंगे टेक सेक्टर के बजाय ग्रोथ की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
कहाँ जा रहा है पैसा?
दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशक अब काफी सेलेक्टिव हो गए हैं। बड़े बैंकिंग और आईटी शेयरों के बजाय, इस बार मिड-कैप शेयरों में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई दे रही है। हालांकि, Nifty 50 और Sensex पर इसका असर मिला-जुला है, जो बाजार के प्रति निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
बड़ी तस्वीर और रिस्क फैक्टर
यह तेजी अच्छी है, लेकिन इसे 2026 के पूरे आंकड़ों के साथ देखना जरूरी है। इस साल की पहली छमाही में FPIs ने बाजार से ₹2.3 लाख करोड़ बाहर निकाले थे, जिसके मुकाबले अगस्त की खरीदारी अभी एक छोटी रिकवरी है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें और जियो-पॉलिटिकल टेंशन जैसे ग्लोबल रिस्क अभी भी बने हुए हैं। एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि कुछ मिड-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन बहुत ऊंचे हो गए हैं, जिससे आने वाले समय में मार्केट में उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है।
