28 अगस्त, 2026 को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से **₹5,040 करोड़** की भारी बिकवाली की है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के मजबूत समर्थन के कारण बाजार पर इसका बड़ा असर नहीं दिखा, क्योंकि यह बिकवाली मुख्य रूप से ब्लॉक डील्स के कारण हुई थी।
बाजार का हाल और FPIs का रुख
28 अगस्त, 2026 को भारतीय बाजारों में विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच बड़ी जंग देखने को मिली। FPIs ने एक ही ट्रेडिंग सेशन में ₹5,040 करोड़ के शेयर बेचे, जो 8 जून के बाद से उनकी सबसे बड़ी बिकवाली है। इस भारी बिकवाली के चलते अगस्त महीने में अब तक की उनकी कुल खरीदारी घटकर महज ₹454 करोड़ रह गई है।
DIIs बने सुरक्षा कवच
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बखूबी संभाला। DIIs ने उसी दिन ₹5,184 करोड़ की खरीदारी की। यह 'टग-ऑफ-वॉर' आजकल के बाजार का नया नॉर्मल बन गया है, जहां विदेशी बिकवाली को घरेलू संस्थाएं लिक्विडिटी देकर बैलेंस कर रही हैं।
ब्लॉक डील्स की भूमिका
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट की असल वजह पैनिक सेलिंग नहीं, बल्कि दो बड़े ब्लॉक डील्स थे। Government of Singapore ने Ather Energy में 3.01% हिस्सेदारी बेचकर ₹1,758 करोड़ जुटाए, वहीं Alpha Wave Ventures ने Lenskart Solutions में 1.7% हिस्सेदारी बेचकर ₹1,857 करोड़ निकाले। केवल इन दो सौदों ने ही कुल बिकवाली का ₹3,615 करोड़ हिस्सा कवर किया।
आगे क्या हो सकता है?
बाजार के लिए चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई के चलते RBI के इंटरेस्ट रेट्स में कटौती पर अनिश्चितता बनी हुई है। अगस्त के महीने में प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी प्लेयर्स की तरफ से बाजार में करीब ₹58,000 करोड़ के नए शेयरों की सप्लाई आई है। अगर भविष्य में DIIs का निवेश धीमा पड़ता है, तो विदेशी बिकवाली बाजार को अस्थिर कर सकती है। निवेशकों को फिलहाल यह देखना होगा कि घरेलू निवेशकों का यह जोश कितनी देर तक बरकरार रहता है।
