FPI PAN Delays: विदेशी निवेशकों पर ब्रेक! भारत में नया इन्वेस्टमेंट रुका

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AuthorNeha Patil|Published at:
FPI PAN Delays: विदेशी निवेशकों पर ब्रेक! भारत में नया इन्वेस्टमेंट रुका
Overview

भारत में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए नए निवेश के दरवाजे एडमिनिस्ट्रेटिव अड़चनों के कारण बंद हो गए हैं। हाल ही में **कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF)** प्रक्रिया में बदलाव और **परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN)** मिलने में हो रही भारी देरी के चलते नए FPIs अपने इन्वेस्टमेंट अकाउंट नहीं खोल पा रहे हैं, जिससे भारत में नए कैपिटल की आवक रुक गई है।

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PAN मिलने में देरी से एफपीआई हो रहे परेशान

यह देरी लगभग एक महीने तक खिंच रही है, जो कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए मार्केट में एंट्री का एक अहम पड़ाव है। यह समस्या हाल ही में कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) प्रोसेस में किए गए बदलावों के बाद शुरू हुई है। एफपीआई रजिस्ट्रेशन, पैन एप्लीकेशन और अकाउंट ओपनिंग को आसान बनाने के लिए बनाए गए इस इंटीग्रेटेड सिस्टम में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अप्रैल से नए पैन एप्लीकेशन फॉर्म और सिस्टम वैलिडेशन लागू किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन बदलावों के कारण डेटा वैलिडेशन में गड़बड़ी और मिसमैच देखने को मिल रहा है। इस एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कत की वजह से कम से कम 20 नए रजिस्टर्ड FPIs फिलहाल अपने ट्रेडिंग या डीमैट अकाउंट नहीं खोल पा रहे हैं, जिससे उनके इन्वेस्टमेंट प्लान्स अटक गए हैं।

'ऑथोराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव' पर विवाद

समस्या यहीं खत्म नहीं होती। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के बीच 'ऑथोराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव्स' बनाम 'ऑथोराइज्ड सिग्नेटरीज' को लेकर चल रहा विवाद भी देरी की एक वजह है। कई प्रोफेशनल्स व्यक्तिगत टैक्स रिस्क की वजह से 'ऑथोराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव' की भूमिका लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में SEBI ने 'ऑथोराइज्ड सिग्नेटरीज' का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।

भारतीय इक्विटीज से भारी निकासी

यह एडमिनिस्ट्रेटिव पेंच फंसा हुआ है, ऐसे समय में जब ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता, इन्फ्लेशन फियर्स और जियोपॉलिटिकल रिस्क के चलते FPIs पहले ही भारतीय इक्विटीज से बड़ी मात्रा में पैसा निकाल चुके हैं। ईयर-टू-डेट (YTD) लगभग ₹2 लाख करोड़ की निकासी हो चुकी है, जो कि 2025 के पूरे साल में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी ज्यादा है।

डिजिटल सिस्टम और असलियत में अंतर

यह PAN एप्लीकेशन का अड़ंगा इस बात का संकेत देता है कि भारत के फाइनेंसियल मार्केट्स में डिजिटल सिस्टम को इंटीग्रेट करने के लक्ष्य और असलियत में कितना अंतर है। SEBI का लक्ष्य FPI रजिस्ट्रेशन के समय को घटाकर 5 दिन करना है, जबकि फिलहाल यह औसतन 30 दिन है। SWAGAT-FI जैसे सिस्टम 30 मई तक लॉन्च होने वाले हैं। मगर, मौजूदा स्थिति दिखाती है कि जब नए सिस्टम लागू होते हैं तो बेसिक पहचान प्रक्रियाओं में भी बड़ी देरी हो सकती है।

कैपिटल फ्लाइट का डर और बढ़ रहा है

FPIs को ऑनबोर्ड करने में हो रही यह एडमिनिस्ट्रेटिव डेडलॉक भारतीय इक्विटीज को लेकर नेगेटिव सेंटिमेंट को और बढ़ा रहा है। विदेशी निवेशक पहले से ही इस साल ज्यादातर समय नेट सेलर्स रहे हैं, और उनकी इक्विटी स्टेक करीब 14 साल के निचले स्तर पर आ गई है। ऐसे में किसी भी तरह की अतिरिक्त रुकावट से कैपिटल आउटफ्लो और बढ़ सकता है। साउथ कोरिया और ताइवान जैसे कॉम्पिटिंग मार्केट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बूमिंग सेक्टर्स की वजह से अच्छा FPI फ्लो अट्रैक्ट कर रहे हैं। यह एडमिनिस्ट्रेटिव देरी, खासकर 'ऑथोराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव' की भूमिका पर अनसुलझे विवाद के साथ, एक खास रिस्क पैदा करती है।

रेगुलेटर्स समाधान की कोशिश में

SEBI, CBDT और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर PAN इश्यू और 'ऑथोराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव' जैसी दिक्कतों को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहा है। 'ऑथोराइज्ड सिग्नेटरीज' को अनुमति देने का प्रस्ताव तत्काल राहत दे सकता है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स SEBI की CBDT के साथ चल रही चर्चाओं पर स्पष्ट अपडेट का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि फॉरेन इन्वेस्टमेंट का भरोसा बहाल करने के लिए त्वरित समाधान बहुत जरूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.