18 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने खरीदारी की है और वे नेट बायर्स बनकर उभरे हैं। उन्होंने बाजार में **₹599.54 करोड़** के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी **₹1,019.69 करोड़** का निवेश कर बाजार को मजबूती प्रदान की है।
भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर 2026 को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने महीने भर की बिकवाली के बाद पासा पलटते हुए नेट बायर्स की भूमिका निभाई। उन्होंने कैश मार्केट में कुल ₹599.54 करोड़ के शेयर खरीदे। उनके साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का भी पूरा साथ मिला, जिन्होंने ₹1,019.69 करोड़ का निवेश किया। सितंबर के महीने में घरेलू निवेशकों का यह लगातार सपोर्ट बाजार के लिए एक बड़ी ढाल बना हुआ है।
बाजार का हाल और मंथली डेटा
सितंबर की बात करें तो अभी भी FIIs का कुल डेटा बिकवाली का है और उन्होंने इस महीने लगभग ₹7,041 करोड़ के शेयर बेचे हैं। हालांकि, इसके मुकाबले DIIs ने ₹36,219 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया है, जिसने विदेशी आउटफ्लो के असर को बेअसर कर दिया है।
बाजार की हलचल की बात करें, तो निफ्टी 50 0.3% उछलकर 23,346 के स्तर पर बंद हुआ, जो लगातार तीसरा दिन है जब बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में और भी ज्यादा जोश दिखा, जहाँ निफ्टी मिडकैप 1.2% और निफ्टी स्मॉलकैप 1.7% ऊपर चढ़ा। इसके अलावा, इंडिया VIX में 7.5% की गिरावट आई, जिससे बाजार की अस्थिरता कम हुई है। सीमेंट, मेटल और मीडिया सेक्टर में तेजी रही, जबकि IT शेयरों पर ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स का दबाव साफ दिखा।
आगे क्या रखें ध्यान?
निवेशकों की नजरें अब मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स पर टिकी हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में राहत और US ट्रेजरी यील्ड का नरम पड़ना उभरते बाजारों के लिए अच्छी खबर है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का US$100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना और भू-राजनीतिक तनाव अभी भी जोखिम बने हुए हैं। आने वाले दिनों में फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI), इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
