11 सितंबर को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों से **₹931 करोड़** निकाले, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने **₹1,968 करोड़** की खरीदारी कर बाजार को बड़ा सहारा दिया है। निवेशक अब क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें, कमजोर रुपया और ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा पर नजर बनाए हुए हैं।
भारतीय शेयर बाजार में 11 सितंबर 2026 को संस्थागत निवेशकों के बीच दो अलग रुख देखने को मिले। एक तरफ विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बिकवाली कर रहे थे, तो दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार के लिए ढाल बनकर खड़े रहे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने ₹930.90 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने ₹1,968.17 करोड़ की खरीदारी की।
सितंबर के महीने में घरेलू निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है और अब तक DIIs बाजार में ₹24,987 करोड़ से ज्यादा निवेश कर चुके हैं। म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों की इस निरंतर खरीदारी ने ग्लोबल बिकवाली के असर को काफी हद तक कम कर दिया है। हालांकि, इन सबके बावजूद निफ्टी 50 में 2.1% की गिरावट देखने को मिली और बाजार का मूड फिलहाल सतर्क बना हुआ है।
बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां
निवेशकों की चिंता के पीछे कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारण हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $108 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। इसके अलावा, भारतीय रुपया भी दबाव में है और यह ₹95.75 से ₹95.80 प्रति डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिससे इंपोर्ट बिल बढ़ने का डर है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (5%) का स्तर ग्लोबल फंड्स को अपनी ओर खींच रहा है, जो उभरते बाजारों के लिए चुनौती है। अब सबकी नजरें भारतीय महंगाई के आंकड़ों (CPI और WPI) और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो भविष्य की दिशा तय करेंगे।
