शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। लगातार **15वें** दिन भी FIIs ने बाजार से **₹5,285 करोड़** निकाले हैं, जबकि घरेलू निवेशक (DIIs) ढाल बनकर **₹3,319 करोड़** की खरीदारी कर बाजार को संभाले हुए हैं।
भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच एक 'टग-ऑफ-वार' (रस्साकशी) चल रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर में भी जारी है, जिससे अब तक कुल निकासी लगभग ₹50,000 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह रुझान इमर्जिंग मार्केट्स के प्रति विदेशी निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
घरेलू निवेशकों का दम
विदेशी बिकवाली के दबाव को कम करने का काम घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बखूबी कर रहे हैं। अक्टूबर महीने में DIIs अब तक ₹51,000 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी कर चुके हैं। इस घरेलू लिक्विडिटी के कारण ही Sensex और Nifty 50 जैसे बेंचमार्क इंडेक्स बड़े पतन से बचे हुए हैं। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में मुनाफावसूली का दबाव साफ देखा जा रहा है।
अर्थव्यवस्था की मजबूती और अन्य फैक्टर्स
बाजार को सहारा देने के लिए IT दिग्गज Tata Consultancy Services (TCS) और HCL Technologies के नतीजों ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसके अलावा, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन में 20% से ज्यादा का उछाल आया है। वहीं, Securities Transaction Tax (STT) कलेक्शन 51.6% बढ़कर ₹46,840 करोड़ हो गया है, जो मार्केट टर्नओवर में तेजी का संकेत है।
आगे की चुनौतियां
निवेशकों को अब ग्लोबल संकेतों पर नजर रखनी होगी, विशेषकर अमेरिका की महंगाई दर और US Federal Reserve के फैसलों पर। साथ ही, मार्केट में डेरिवेटिव सेटलमेंट प्रोसेस और SEBI के नए रेगुलेटरी बदलावों को लेकर भी हलचल है। बाजार अब अगली तिमाही के नतीजों और ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा पर नजर टिकाए बैठा है।
