27 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में **₹4,240 करोड़** की भारी खरीदारी की है, जो इस महीने का सबसे बड़ा निवेश है। दूसरी ओर, घरेलू निवेशकों ने **₹1,250 करोड़** की बिकवाली की, फिर भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में शानदार तेजी देखी गई।
भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुझान फिर से सकारात्मक होता दिख रहा है। 27 अक्टूबर को FIIs ने बाजार में ₹4,240.39 करोड़ का नेट इन्वेस्टमेंट किया है, जो इस महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने प्रॉफिट बुकिंग करते हुए ₹1,250.03 करोड़ के शेयर बेचे, जो अक्टूबर के मध्य के बाद से उनकी पहली बड़ी बिकवाली है।
बाजार का रुख और VIX
Nifty 50 इंडेक्स 22,750 के स्तर पर स्थिर रहा, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया, जिनमें क्रमशः 1% और 2.7% की बढ़त दर्ज की गई। अच्छी बात यह रही कि डर का पैमाना माना जाने वाला इंडिया VIX 4.4% गिर गया, जिससे साफ है कि बाजार की घबराहट कम हो रही है।
IT सेक्टर पर दबाव
जहां बाजार के अन्य हिस्से चमक रहे थे, वहीं IT इंडेक्स 1.4% से अधिक फिसल गया। इसकी मुख्य वजह Infosys के रेवेन्यू आउटलुक में कटौती रही। इस खबर का असर Tata Consultancy Services और Wipro जैसे दिग्गजों पर भी दिखा, क्योंकि निवेशकों को अब IT कंपनियों की ग्रोथ को लेकर सतर्क रहने की चिंता है।
ग्लोबल चुनौतियां और घरेलू विकास
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें US$116 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो महंगाई और कंपनियों के मार्जिन के लिए एक चुनौती है। हालांकि, सरकार का फोकस घरेलू विकास पर है। हाल ही में ₹2.12 लाख करोड़ के डिफेंस एक्विजिशन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसका सीधा फायदा स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स को होगा। इसके अलावा, ₹17.73 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी पाइपलाइन में हैं, जो भविष्य में औद्योगिक विकास के लिए बड़े इंजन साबित हो सकते हैं।
