विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अक्टूबर डेरिवेटिव सीरीज की शुरुआत काफी सतर्कता के साथ की है। वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं और पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में पुट (Put) ऑप्शंस खरीद रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के आसार हैं।
सितंबर के अस्थिर महीने के बाद, जहां निफ्टी में 6.5% की गिरावट देखी गई, विदेशी निवेशक अब जोखिम लेने के बजाय अपने निवेश को बचाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हाल के दिनों में दैनिक बिकवाली का आंकड़ा अक्सर ₹4,000 करोड़ के पार निकल गया है, जो बताता है कि संस्थागत खिलाड़ी अभी भी मार्केट में भरोसे की कमी महसूस कर रहे हैं।
क्यों सतर्क हैं निवेशक?
बाजार में इस सावधानी की सबसे बड़ी वजह 7 अक्टूबर, 2026 को आने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी है। ब्याज दरों में संभावित बदलाव और महंगाई पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी का असर बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे संवेदनशील सेक्टर पर पड़ सकता है, यही कारण है कि बड़े निवेशक पहले ही अपनी पोजीशन को हेज (Hedge) कर रहे हैं।
बाजार का तकनीकी हाल
निफ्टी में 22,600 के स्तर के ऊपर जो तेजी दिखी, वह मुख्य रूप से 'शॉर्ट-कवरिंग' का नतीजा थी, न कि नई खरीदारी का। फिलहाल, 22,800 पर कड़ा रेजिस्टेंस है, जबकि 22,400-22,500 का जोन एक क्रिटिकल सपोर्ट बना हुआ है। वहीं, इंडिया VIX 14-15 के दायरे में है, जो मार्केट में बनी बेचैनी को दर्शाता है।
सेक्टर रोटेशन
निवेशक अब आक्रामक सेक्टरों जैसे मेटल, सीमेंट और केमिकल से दूरी बनाकर टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे सुरक्षित (Defensive) सेक्टरों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। आने वाले समय में RBI का फैसला ही तय करेगा कि मार्केट किस दिशा में जाएगा। तब तक, मार्केट की चाल पूरी तरह से हेजिंग और पॉलिसी से जुड़ी अनिश्चितताओं से नियंत्रित रहेगी।
