1 सितंबर, 2026 को विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों में कुल **₹2,990 करोड़** से अधिक का निवेश किया। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के चलते बेंचमार्क इंडेक्स पर भारी दबाव देखने को मिला, जिसने मजबूत GDP ग्रोथ के असर को भी फीका कर दिया।
1 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एक्सचेंज के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, FII ने कैश सेगमेंट में ₹1,143 करोड़ और DII ने ₹1,847 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। यह इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट बाजार के लिए एक कवच जैसा था, लेकिन ग्लोबल सेंटीमेंट के आगे यह काफी नहीं रहा।\n\n### बाजार का हाल\nBSE Sensex 12.99 अंक गिरकर 76,944.28 पर, जबकि Nifty 50 24.60 अंक फिसलकर 24,055.80 पर बंद हुआ। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $92 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।\n\n### साल 2026: एक बड़ा टग-ऑफ-वार\nइस साल FIIs अब तक भारतीय बाजारों से कुल ₹3.50 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि DIIs ने बाजार को संभालते हुए साल-दर-तारीख (YTD) आधार पर ₹5.50 लाख करोड़ की खरीदारी की है।\n\n### अन्य प्रमुख खबरें\n* Tribhovandas Bhimji Zaveri: GRT Jewellers द्वारा हिस्सेदारी खरीदने की खबर पर शेयर 20% उछला।\n* Happiest Minds: ITC Infotech द्वारा 22.1% हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा के बाद स्टॉक 10% से ज्यादा टूटा।\n\nभविष्य के लिए, ग्लोबल एनर्जी कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव ही बाजार की चाल तय करेंगे। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनियां बढ़ती कच्चे माल की लागत और मार्जिन प्रेशर को कैसे मैनेज करती हैं।
