भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने कर्नाटक में बड़े पैमाने पर 'Form 7' के दुरुपयोग की खबरों के बाद एक उच्च-स्तरीय जांच शुरू की है। आरोप है कि चुनावी सूची से वोटर्स के नाम हटाने के लिए फर्जी फॉर्म भरे गए हैं, जिस पर अब आयोग ने फिजिकल वेरिफिकेशन (physical verification) के सख्त निर्देश दिए हैं।
भारत निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक की चुनावी सूचियों की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत जांच शुरू की है। यह कार्रवाई तब हुई है जब राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं ने 'Form 7' (वोटर लिस्ट से नाम हटाने का फॉर्म) के संगठित दुरुपयोग की शिकायत की। आरोप है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक सुनियोजित साजिश है।
किन इलाकों पर है फोकस?
जांच की मुख्य जद में विजयनगर, बेलगावी, विजयपुरा और बिदर जैसे जिले हैं। चुनाव अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में नाम हटाने के अनुरोधों (deletion requests) में असामान्य उछाल दर्ज किया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ये फॉर्म पहले से प्रिंटेड थे और उन पर भारी मात्रा में हस्ताक्षर किए गए थे, जिनमें विशेष रूप से दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाया गया है।
आयोग का अगला कदम
आयोग ने चुनावी पंजीकरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल डिजिटल रिकॉर्ड पर निर्भर न रहें, बल्कि हर विवादित दावे का फिजिकल वेरिफिकेशन करें ताकि कोई भी वैध मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे। साथ ही, बूथ-वार ऑडिट (booth-wise audit) करने का आदेश दिया गया है ताकि पता लगाया जा सके कि क्या इसमें किसी बाहरी डेटा का दुरुपयोग हुआ है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि जो भी व्यक्ति फर्जी आपत्तियां दाखिल करने या चुनावी धोखाधड़ी में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ चुनावी कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
