Election Commission of India (ECI) ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'Form 7' के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब कोई भी व्यक्ति मनमाने ढंग से बल्क में आवेदन नहीं कर पाएगा।
चुनाव आयोग ने कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में सामने आए बल्क फाइलिंग के मामलों के बाद यह कड़ा कदम उठाया है। अब नए निर्देशों के तहत, 'Intensive Summary Revision' के दौरान एक व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म भर सकता है, जबकि सामान्य दिनों में यह सीमा प्रति महीने सिर्फ 5 आवेदनों की होगी। ये नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों ही माध्यमों पर लागू होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
आयोग का मानना है कि बड़ी संख्या में बिना आधार के नाम हटाने के आवेदन प्रशासनिक व्यवस्था पर बोझ डाल रहे थे। कई मामलों में तो वैध वोटरों के नाम उनकी जानकारी के बिना ही हटाने की कोशिशें सामने आई थीं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बनाए रखना है।
EROs के लिए क्या बदलेगा?
नियमों को और सख्त बनाते हुए, Electoral Registration Officers (EROs) को भी निर्देश दिए गए हैं। अब किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले, नाम हटाने की मांग करने वाले व्यक्ति को औपचारिक नोटिस भेजना अनिवार्य होगा। साथ ही, एक 'Personal Hearing' (व्यक्तिगत सुनवाई) भी की जाएगी। EROs को 'Registration of Electors Rules of 1960' के तहत साक्ष्यों की पूरी जांच-पड़ताल करनी होगी, ताकि कोई भी पात्र मतदाता गलत तरीके से लिस्ट से बाहर न हो जाए।
