Enforcement Directorate (ED) ने McNally Bharat Engineering से जुड़ी **17** जगहों पर छापेमारी की है। मामला Foreign Exchange Management Act और इंसॉल्वेंसी प्रोसेस में गड़बड़ी से जुड़ा है। कंपनी के रिजॉल्यूशन प्लान की वैधता पर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
Enforcement Directorate (ED) ने बुधवार को McNally Bharat Engineering Company Limited के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु समेत करीब 17 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी इस कंपनी के हालिया 'कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस' (CIRP) में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है, जिसे National Company Law Tribunal (NCLT) की निगरानी में पूरा किया गया था।
जांच का मुख्य बिंदु
जांच का केंद्र Foreign Exchange Management Act (FEMA) के कथित उल्लंघन पर टिका है। फेडरल इन्वेस्टिगेटर्स इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि कंपनी के अधिग्रहण के दौरान जो फंड इस्तेमाल हुआ, उसका स्रोत क्या था। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या फंडिंग स्ट्रक्चर कानूनी मानकों के मुताबिक था, या इसका इस्तेमाल रिजॉल्यूशन प्रोसेस में शामिल असली प्रमोटरों की पहचान छिपाने के लिए किया गया था।
IBC के सेक्शन 29A पर सवाल
एजेंसी इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सेक्शन 29A के संभावित उल्लंघन की बारीकी से जांच कर रही है। यह कानूनी प्रावधान उन डिफॉल्टर प्रमोटरों को कंपनी पर फिर से कब्जा करने से रोकता है, जिनका पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि नियमों को दरकिनार कर 'बैक-डोर' से एंट्री ली गई है, तो कंपनी के मैनेजमेंट और ओनरशिप स्ट्रक्चर पर गंभीर कानूनी संकट आ सकता है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
McNally Bharat लंबे समय से भारी कर्ज और ऑपरेशनल चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी के भविष्य के लिए इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस बेहद अहम था। अब जबकि रेगुलेटरी एजेंसियां इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठा रही हैं, तो कंपनी के कामकाज और गवर्नेंस को लेकर बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई है। निवेशकों की नजरें अब मैनेजमेंट की तरफ से आने वाले आधिकारिक बयानों और शेयर बाजार में दी जाने वाली सफाई पर टिकी हैं।
