Delhi High Court ने Chaubara Eats की याचिका को खारिज कर दिया है। SEBI ने कंपनी और Prrsaar Sampada पर **₹28.12 करोड़** के F&O मैनिपुलेशन का आरोप लगाया है, जिसके बाद उन पर लगा मार्केट बैन जारी रहेगा।
कोर्ट का सख्त रुख
Delhi High Court ने 16 सितंबर को SEBI द्वारा जारी किए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद Chaubara Eats का शेयर बाजार से बैन फिलहाल बना रहेगा। कोर्ट ने प्रक्रियात्मक आधारों का हवाला देते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिससे कंपनी के लिए फिलहाल राहत की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
कैसे हुई मैनिपुलेशन?
SEBI की जांच के केंद्र में 'क्रॉस-सेगमेंट मैनिपुलेशन' है। रेगुलेटर का आरोप है कि Chaubara Eats और Prrsaar Sampada ने मिलकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स का गलत इस्तेमाल किया। इन कंपनियों ने कथित तौर पर सिंगल-स्टॉक फ्यूचर्स के जरिए शेयरों की कीमतों को कृत्रिम रूप से प्रभावित किया, ताकि ऑप्शंस सेगमेंट में अवैध मुनाफा कमाया जा सके। SEBI ने इन ट्रेड पैटर्न्स को 'धोखाधड़ी' करार दिया है।
₹28.12 करोड़ की रिकवरी
रेगुलेटर ने इस घोटाले से कमाए गए ₹28.12 करोड़ के गलत मुनाफे को जब्त करने का आदेश दिया है। इसमें से ₹22.06 करोड़ की राशि Prrsaar Sampada और उसके निदेशकों से, जबकि ₹6.06 करोड़ Chaubara Eats से संबंधित है। इन पैसों को अब फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाएगा ताकि जांच पूरी होने तक इनका उपयोग न किया जा सके।
मार्केट के लिए संकेत
यह मामला डेरिवेटिव मार्केट में SEBI की सख्त निगरानी को दर्शाता है। भले ही ये छोटी कंपनियां हों, लेकिन डेटा एनालिटिक्स के जरिए पकड़ी गई यह धांधली सभी ट्रेडर्स के लिए एक चेतावनी है। अब इन कंपनियों के पास आगे की कानूनी लड़ाई के लिए Securities Appellate Tribunal (SAT) का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है।
