Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) अब Data Protection Board of India के गठन की प्रक्रिया तेज कर रही है। कोर्ट के निर्देश के बाद यह बोर्ड डेटा प्राइवेसी और कंपनियों पर जुर्माने के लिए मुख्य अथॉरिटी होगा।
कोर्ट का दखल और बोर्ड का गठन
Kerala High Court ने सरकार को 8 हफ्ते के भीतर Data Protection Board को फंक्शनल बनाने का निर्देश दिया है। यह कदम एयरपोर्ट पर पैसेंजर डेटा के गलत इस्तेमाल को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद उठाया गया है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि सरकार अब डिजिटल प्राइवेसी को लेकर बहुत सख्त होने वाली है।
कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
यह बोर्ड 'Digital Personal Data Protection Act' को लागू करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है, जो 13 मई 2027 से पूरी तरह प्रभावी होगा। इस कानून के तहत कंपनियों को डेटा ब्रीच और प्राइवेसी मानकों पर भारी-भरकम फाइनेंशियल पेनल्टी (Penalty) देनी पड़ सकती है।
Consent Manager और अनिश्चितता
फिलहाल, फिनटेक (Fintech), ई-कॉमर्स और टेलीकॉम सेक्टर की कंपनियां एक 'रेगुलेटरी लिम्बो' (Regulatory Limbo) में हैं। नियमों की स्पष्टता न होने से कंपनियां अपना कंप्लायंस फ्रेमवर्क फाइनल नहीं कर पा रही हैं। ध्यान रहे, 13 नवंबर 2026 से 'Consent Manager' के तौर पर काम करने वाली कंपनियों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
सख्त रेगुलेशन की तैयारी
यह बोर्ड पूरी तरह 'पेपरलेस' (Paperless) होगा और इसमें सीनियर लेवल के एक्सपर्ट्स शामिल किए जाएंगे। लिस्टेड कंपनियां जो कंज्यूमर डेटा पर निर्भर हैं, उनके लिए कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) में बढ़ोतरी तय है। निवेशकों को सलाह है कि वे बोर्ड के गठन और गाइडलाइंस पर नज़र रखें, क्योंकि नियमों का उल्लंघन सीधे कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ पर असर डाल सकता है।
