27 अगस्त को भारतीय बाजार में संस्थागत निवेशकों के बीच जबरदस्त खींचतान दिखी। जहां विदेशी निवेशकों (FII) ने **₹298 करोड़** की बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने **₹4,977 करोड़** के शेयर खरीदकर बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया।
बाजार का नया 'पिलर' बने DII
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 27 अगस्त, 2026 के कारोबारी सत्र में घरेलू निवेशकों (DII) ने भारतीय बाजार में जमकर खरीदारी की। इनकी ₹4,977 करोड़ की नेट बाइंग ने न केवल विदेशी निवेशकों (FII) की ₹298 करोड़ की बिकवाली को बेअसर किया, बल्कि बाजार को मजबूती भी प्रदान की। अगस्त महीने में अब तक घरेलू संस्थान कुल ₹65,990 करोड़ से ज्यादा का निवेश कर चुके हैं, जो बाजार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।
क्यों फंसा है बाजार रेंज में?
बाजार फिलहाल एक 'टग-ऑफ-वॉर' की स्थिति में है। एक तरफ घरेलू लिक्विडिटी (Liquidity) बाजार को नीचे गिरने से रोक रही है, तो दूसरी तरफ ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हैं। इस वजह से बाजार में कोई बड़ी रैली नहीं दिख रही है और यह सीमित दायरे में घूम रहा है। इंडिया VIX भी ग्लोबल अनिश्चितताओं पर लगातार रिएक्ट कर रहा है, जिससे ट्रेडर्स सावधानी बरत रहे हैं।
आगे निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अब सबकी नजरें जुलाई के औद्योगिक उत्पादन (IIP) डेटा पर टिकी हैं। यदि यह डेटा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती दिखाता है, तो बाजार अपने मौजूदा दायरे को तोड़कर ऊपर की ओर बढ़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल AI ट्रेंड्स और भारतीय IT कंपनियों के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है। जब तक कोई ठोस मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा नहीं आता, तब तक DII और FII के निवेश पैटर्न ही बाजार की दिशा तय करेंगे।
