एविएशन रेगुलेटर DGCA ने पायलटों के कड़े रेस्ट नियमों (Pilot Rest Rules) को लागू करने की समय-सीमा को **31 मार्च, 2027** तक बढ़ा दिया है। तीसरी बार मिली इस मोहलत से एयरलाइंस को अपनी भर्ती और ऑपरेशनल खर्चों को मैनेज करने का अतिरिक्त समय मिल गया है, हालांकि सेफ्टी के मुद्दे पर पायलट यूनियनें नाराज हैं।
एयरलाइंस को क्यों मिली राहत?
DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन से जुड़े नियमों को लागू करने के लिए भारतीय एयरलाइंस को 5 महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है। इन नियमों का मुख्य मकसद पायलटों की थकान कम करना है, जिसमें नाइट शिफ्ट की कैलकुलेशन और लैंडिंग की संख्या सीमित करने जैसे बदलाव शामिल हैं। अब इसकी नई डेडलाइन 31 मार्च, 2027 है।
कंपनियों पर वित्तीय असर (Financial Impact)
इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, अगर ये नियम तुरंत लागू हो जाते, तो मौजूदा फ्लाइट शेड्यूल को बनाए रखने के लिए एयरलाइंस को अपने पायलट स्टाफ में 25% तक का इजाफा करना पड़ता। InterGlobe Aviation (IndiGo) जैसी लिस्टेड कंपनियों के लिए इसका मतलब था—वेज बिल और ट्रेनिंग खर्चों में भारी उछाल, जिससे सीधे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ता। फिलहाल एयरलाइंस पहले से ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल और करेंसी फ्लक्चुएशन जैसे हाई ऑपरेशनल कॉस्ट से जूझ रही हैं, ऐसे में यह एक्सटेंशन उनके लिए बड़ी राहत है।
विवाद की वजह और निवेशकों के लिए सीख
यह फैसला विवादों के घेरे में भी है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का कहना है कि बार-बार नियमों में ढील देना पायलटों की सेहत और सुरक्षा की अनदेखी है। हालांकि सरकार ने इसे आखिरी विस्तार बताया है, लेकिन निवेशकों के लिए अब नजर इस पर होनी चाहिए कि एयरलाइंस कितनी तेजी से नई भर्ती और रोस्टरिंग सिस्टम को अपग्रेड करती हैं। मार्च 2027 तक पर्याप्त स्टाफ न होने पर कंपनियों को ऑपरेशन्स में रुकावट या अचानक बढ़े हुए खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।
