Citigroup ने अपना नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'eFPI @ Citi' लॉन्च किया है। इसके जरिए फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) का रजिस्ट्रेशन अब हफ्तों के बजाय सिर्फ **5** वर्किंग दिनों में पूरा हो जाएगा।
डिजिटल क्रांति से आसान होगा निवेश
10 सितंबर, 2026 को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म 'eFPI @ Citi' का मकसद भारतीय बाजार में आने वाली जटिलताओं को खत्म करना है। बैंक ने डिजिटल सिग्नेचर और कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म का उपयोग करके मैन्युअल पेपरवर्क को पूरी तरह हटा दिया है। NSDL के साथ डायरेक्ट API इंटीग्रेशन होने की वजह से डेटा वेरिफिकेशन अब तुरंत हो जाता है।
किन देशों के निवेशकों को मिलेगा फायदा?
अभी यह सर्विस अमेरिका, आयरलैंड और लक्जमबर्ग के रेगुलेटेड पब्लिक फंड्स के लिए चालू है। अगले फेज में Citi इसे सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके के निवेशकों के लिए भी शुरू करेगा। भारत के कस्टोडियल बिजनेस में Citi की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है, जिसे देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या अभी भी हैं चुनौतियां?
भले ही बैंक ने अपना प्रोसेस तेज कर दिया है, लेकिन कुछ बाहरी फैक्टर्स अभी भी मायने रखते हैं। उदाहरण के लिए, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मिलने वाला पैन (PAN) अलॉटमेंट अभी भी बैंक के इंटरनल सिस्टम का हिस्सा नहीं है। अगर सरकारी स्तर पर कोई देरी होती है, तो इसका असर रजिस्ट्रेशन टाइमलाइन पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कस्टोडियल सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। अन्य डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DDPs) भी अब इसी तरह की तकनीक लाने पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पूरा इंडस्ट्री स्टैंडर्ड इस 5 दिन की डेडलाइन को अपना पाता है या नहीं।
