कंज्यूमर राइट्स वॉचडॉग CCPA ने Rapido की पेरेंट कंपनी Roppen Transportation Services पर **₹10 लाख** का जुर्माना ठोका है। कंपनी पर ग्राहकों को गुमराह करने वाले 'डार्क पैटर्न' और जबरन टिपिंग प्रॉम्ट्स का इस्तेमाल करने का आरोप है।
रेगुलेटर की नजर में क्या है गड़बड़ी?
CCPA की जांच में Rapido के मोबाइल ऐप पर ऐसे डिजाइन एलिमेंट्स पकड़े गए हैं, जिन्हें रेगुलेटर ने 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' माना है। कंपनी पर 'कन्फर्म शेमिंग' और कलर-कोडेड प्राइसिंग स्लाइडर्स जैसे ट्रिक्स का इस्तेमाल करने का आरोप है। इन फीचर्स का मकसद बुकिंग के दौरान ग्राहकों में कृत्रिम घबराहट पैदा करना था, ताकि वे अपनी मर्जी से ज्यादा भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाएं।
खासकर टिपिंग के फीचर को लेकर रेगुलेटर बेहद सख्त है। CCPA का कहना है कि राइड शुरू होने से पहले टिप मांगने का सिस्टम गलत है। टिप्स केवल राइड खत्म होने के बाद एक स्वैच्छिक रिवॉर्ड (Voluntary Reward) के तौर पर होनी चाहिए, न कि बुकिंग फ्लो का हिस्सा बनाकर ड्राइवर मिलने की शर्त के रूप में पेश की जानी चाहिए।
गिग इकोनॉमी पर क्या होगा असर?
Rapido एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए इसका सीधा असर शेयर बाजार पर नहीं दिख रहा है। लेकिन, यह फैसला पूरी राइड-हेलिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सिग्नल है। CCPA ने साफ कर दिया है कि वह Uber, Ola और Namma Yatri जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के ऐप डिजाइन और 'डार्क पैटर्न' की भी जांच कर रहा है।
भविष्य की तैयारी और IPO के संकेत
भले ही कंपनी लिस्टेड नहीं है, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि Rapido IPO की तैयारी कर रही है। साल 2025 में फाउंडर्स का खुद को 'नॉन-प्रमोटर' घोषित करना इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। ऐसे में भविष्य में बाजार में उतरने के लिए कंपनी को रेगुलेटरी गाइडलाइन्स का पालन करना अनिवार्य होगा। अगर कंपनी को अपना ब्रांड इमेज और ऑपरेशनल स्टैबिलिटी बनाए रखनी है, तो उसे सरकार के नए नियमों के हिसाब से अपने ऐप इंटरफेस को पूरी तरह से बदलना होगा।
