भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) अब खुद से जांच शुरू करने (Suo Motu Probes) के मामलों में कमी ला रहा है। आयोग ने संसदीय समिति को बताया है कि जांचकर्ता और जज की दोहरी भूमिका के कारण हितों के टकराव की आशंका है, इसलिए अब बाहरी शिकायतों पर ही कार्रवाई करेगा। आयोग ने अब तक के कुल 1,375 एंटी-ट्रस्ट मामलों में से 1,237 को सुलझा लिया है।
Detailed Coverage
जांच के तरीके में बदलाव
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) अब अपनी स्वतंत्र जांच, जिन्हें Suo Motu मामले कहा जाता है, शुरू करने के तरीके में बदलाव कर रहा है। एक संसदीय समिति के साथ हालिया चर्चा में, आयोग ने बताया कि वह हितों के टकराव से बचने के लिए इन जांचों को शुरू करने से पीछे हट रहा है। यह समस्या आयोग की दोहरी भूमिका से उत्पन्न होती है, जहां वह एक तरफ मामले का निर्माण करता है और दूसरी तरफ कानूनी कार्यवाही में अंतिम निर्णय भी देता है।
पुरानी राहें छोड़, नई डगर
CCI की अध्यक्ष, नवनीत कौर (Ravneet Kaur) ने बताया कि आयोग ने अपने शुरुआती वर्षों में जांच शुरू करने की शक्ति का अक्सर इस्तेमाल किया था, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं। व्यवसायों और आम जनता के बीच प्रतिस्पर्धा कानूनों के बारे में जागरूकता बढ़ने के साथ, आयोग अब बाहरी पक्षों द्वारा शिकायतें लाए जाने पर ही कार्रवाई करना पसंद करता है। यह संयम विशेष रूप से उन क्षेत्रों में देखा जा रहा है जो पहले से ही विशिष्ट उद्योग नियामकों द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं।
आंकड़ों का आईना
आयोग के समग्र प्रदर्शन की बात करें तो, समिति को प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि CCI ने अपने काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा कर लिया है। अपनी स्थापना के बाद से प्राप्त कुल 1,375 एंटी-ट्रस्ट मामलों में से 1,237 मामलों का निपटारा कर दिया गया है। यह मौजूदा बैकलॉग को साफ करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ नई जांचों को शुरू करने के तरीके को परिष्कृत करने का संकेत देता है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना पर स्पष्टीकरण
संसदीय समिति ने CCI से एंड्रॉइड स्मार्ट टीवी मामले में लगाए गए ₹20.24 करोड़ के जुर्माने के बारे में भी पूछताछ की। कुछ पर्यवेक्षकों ने इसकी तुलना यूरोपीय संघ द्वारा इसी तरह के मामलों में लगाए गए अरबों डॉलर के जुर्माने से की थी। अध्यक्ष कौर ने स्पष्ट किया कि भारतीय निपटान की गणना भारत में स्मार्ट टीवी ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार से जुड़े प्रासंगिक टर्नओवर के आधार पर की गई थी।
उन्होंने समझाया कि यूरोपीय संघ की कार्रवाइयों से इसकी तुलना करना सटीक नहीं है क्योंकि यूरोपीय संघ का मामला मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़े बहुत बड़े बाजार खंड पर केंद्रित था। भारतीय जुर्माने की राशि को मौजूदा नियमों के तहत वैधानिक 15% छूट सहित, विशिष्ट बढ़त और घटत वाले कारकों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया था।
