Competition Commission of India (CCI) ने Trustees’ Association of India और तीन बड़ी ट्रस्टी कंपनियों को सर्विस फीस को लेकर मिलीभगत करने पर फटकार लगाई है। रेगुलेटर ने 'सीज एंड डेसिस्ट' (cease-and-desist) का आदेश जारी कर दिया है।
कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने Trustees’ Association of India (TAI) के साथ-साथ IDBI Trusteeship Services, Axis Trustee Services और SBI CAP Trustee Company को फीस फिक्सिंग बंद करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 2021 और 2022 फाइनेंशियल ईयर के दौरान कंपनीज के कामकाज की जांच के बाद की गई है।
क्या है पूरा मामला?
जांच में सामने आया कि ये कंपनियां आपस में मिलकर डिबेंचर ट्रस्टीशिप सर्विसेज के लिए फीस बेंचमार्क तय कर रही थीं। इस मिलीभगत के कारण कंपनियों के बीच स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई थी, क्योंकि उन्हें तय लिमिट से कम फीस पर सर्विस देने से रोका जाता था। CCI के मुताबिक, यह मार्केट में निष्पक्ष मूल्य निर्धारण (Fair Pricing) के खिलाफ है।
Muthoot Finance की शिकायत से हुआ खुलासा
इस जांच की शुरुआत 2021 में Muthoot Finance द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। कंपनी ने बताया था कि ₹982 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के लिए जब वे सर्विस कोट मांग रहे थे, तो उन्हें बहुत ही कठोर और एक समान फीस स्ट्रक्चर का सामना करना पड़ा, जिससे सही मोल-भाव करना मुश्किल हो गया था।
जुर्माना नहीं, लेकिन कड़ी चेतावनी
हालांकि, CCI ने इस बार कंपनियों पर कोई मौद्रिक जुर्माना (Monetary Penalty) नहीं लगाया है, लेकिन उन्हें भविष्य के लिए सख्त चेतावनी दी है। रेगुलेटर ने साफ कहा है कि अगर दोबारा ऐसा होता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब इंडस्ट्री को अपने इंटरनल बिडिंग प्रोसेस और फीस तय करने के तरीके को बदलना होगा, ताकि मार्केट में पारदर्शिता बनी रहे। डिबेंचर होल्डर्स के हितों की रक्षा के लिए इन ट्रस्टी कंपनियों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
