सरकार ने GST रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाते हुए **7** दिनों की 'डीम्ड अप्रूवल' पॉलिसी लागू की है। इसका मकसद बिजनेस को मिलने वाली मंजूरी में देरी को खत्म करना और अनुपालन (Compliance) के बोझ को कम करना है।
अब रजिस्ट्रेशन में नहीं अटकेगा काम
Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) ने GST फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव किया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर टैक्स अधिकारी 7 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उसे अपने आप 'डीम्ड अप्रूवल' मिल जाएगा। यह नियम उन 39% आवेदकों के लिए बड़ी राहत है जिन्हें पहले मैनुअल स्क्रूटनी का लंबा इंतजार करना पड़ता था।
आधार और वेरिफिकेशन के नए नियम
जिन कंपनियों को आधार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जरूरत है, उनके लिए 15 दिनों का समय तय किया गया है। वेरिफिकेशन पूरा होने के 7 दिन के अंदर अधिकारियों को या तो एप्लीकेशन प्रोसेस करनी होगी या सवाल उठाने होंगे। इससे स्टार्टअप्स और टेलीकॉम सेक्टर जैसे उन बिजनेस को काफी मदद मिलेगी, जो अक्सर कागजी कार्रवाई के चलते देरी का सामना करते थे।
विवादों पर नकेल और नोटिस में बदलाव
सरकार ने कानूनी विवादों को कम करने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। अब टैक्स नोटिस (SCN) बिना ठोस सबूतों के जारी नहीं किए जा सकेंगे। अधिकारियों को यह भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे नोटिस में 'टेंटेटिव' भाषा का इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी कंपनी को पहले से दोषी न ठहराया जाए। इस कदम से बेवजह की लंबी और महंगी कानूनी लड़ाई (Litigation) पर रोक लगेगी।
बिजनेस पर क्या होगा असर?
यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में एक बड़ा सुधार है। देशभर में काम करने वाली कंपनियों को अब अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन के दौरान नियमों की एकरूपता देखने को मिलेगी। हालांकि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन प्रशासनिक खर्च कम होने से कंपनियां अब अपना ध्यान मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस पर लगा सकेंगी। अब देखना यह है कि राज्य स्तर पर टैक्स विभाग इसे कितनी तेजी से लागू करते हैं।
