CBIC GST Rules: पुरानी गाड़ियों के डीलर्स को बड़ी राहत, NBFC के को-लेंडिंग सर्विस पर टैक्स का फैसला

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AuthorAditya Rao|Published at:
CBIC GST Rules: पुरानी गाड़ियों के डीलर्स को बड़ी राहत, NBFC के को-लेंडिंग सर्विस पर टैक्स का फैसला

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने GST नियमों को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। अब यूज्ड कार डीलर्स अपने ऑपरेशनल खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकेंगे। वहीं, बैंकों और NBFC के बीच को-लेंडिंग सर्विस को टैक्स के दायरे में लाया गया है।

CBIC ने ऑटो और फाइनेंस सेक्टर में टैक्स को लेकर चल रही अस्पष्टता को दूर करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। GST काउंसिल की सिफारिशों के बाद आए इन सर्कुलर का मकसद अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना है।

यूज्ड कार डीलर्स को ITC का तोहफा

अब तक यूज्ड कार डीलर्स इस उलझन में थे कि वे किन खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ले सकते हैं। नियम के मुताबिक, डीलर गाड़ी की खरीद और बिक्री के अंतर पर GST देते हैं। अब CBIC ने स्पष्ट किया है कि डीलर गाड़ी की रिपेयरिंग, मेंटेनेंस, मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी जैसे सर्विस इनपुट पर ITC क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, पुरानी गाड़ी खरीदने पर कोई ITC नहीं मिलेगा। यह फैसला संगठित क्षेत्र के डीलर्स की लागत कम करने और टैक्स फाइलिंग को व्यवस्थित करने में मदद करेगा।

NBFC की को-लेंडिंग सर्विस पर टैक्स की क्लैरिटी

फाइनेंशियल सेक्टर में NBFC और बैंकों की भागीदारी वाले 'को-लेंडिंग' मॉडल पर बड़ा अपडेट आया है। को-लेंडिंग में बैंक पूंजी लगाते हैं, जबकि NBFC लोन ओरिजिनेशन और कलेक्शन जैसी सेवाएं देते हैं। रेगुलेटर ने साफ कर दिया है कि NBFC द्वारा बैंकों को दी जाने वाली इन इंटरमीडियरी सर्विसेज पर GST लगेगा।

टैक्स की गणना इन दोनों के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट में तय की गई सर्विस फीस के आधार पर होगी। इस नियम का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और अकाउंटिंग को स्टैंडर्ड बनाना है। अब बैंकों और NBFC को अपनी सर्विस फीस पर स्पष्टता के साथ टैक्स देना होगा, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के कंप्लायंस गैप से बचा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.