CBI ने 2002 के Hindustan Zinc विनिवेश मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी को इसमें किसी भी तरह की आपराधिक गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले हैं। 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच शुरू हुई थी, और अब स्पेशल कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है जिससे इस पुराने मामले में कानूनी अनिश्चितता खत्म हो सकती है।
CBI की जांच में क्या निकला?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने स्पेशल कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंपी है। यह मामला साल 2002 में सरकार द्वारा अपनी 26% हिस्सेदारी Sterlite Opportunities and Ventures Limited को बेचने से जुड़ा था। जांच एजेंसी का साफ कहना है कि उन्हें इस सेल में किसी भी तरह की धांधली या आपराधिक साजिश के ठोस सबूत नहीं मिले हैं। यह मामला तब चर्चा में आया था जब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी को ₹445 करोड़ में बेचा था, जिस पर बाद में काफी सवाल उठे थे।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
शेयर बाजार में किसी भी कंपनी पर कानूनी तलवार लटकी हो, तो उसका असर स्टॉक की चाल पर पड़ता है और शेयर अक्सर अपनी असल कीमत से डिस्काउंट पर ट्रेड करता है। CBI की यह रिपोर्ट कंपनी के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है, हालांकि अभी स्पेशल कोर्ट की मंजूरी मिलना बाकी है। अगर कोर्ट इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है, तो कंपनी के ऊपर से एक पुराना कानूनी बोझ हट जाएगा।
कंपनी का हाल और रेगुलेटरी चुनौतियां
हालांकि यह मामला खत्म होने की कगार पर है, लेकिन कंपनी का सफर अभी भी रेगुलेटरी चुनौतियों से भरा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी Foreign Exchange Management Act के तहत अलग से जांच कर रही है।
वहीं, अगर हम कामकाज की बात करें, तो Hindustan Zinc ने हाल ही में शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। Q1 FY27 के नतीजों में कंपनी का रेवेन्यू रिकॉर्ड ₹13,747 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 145% की जबरदस्त उछाल देखी गई। कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और कानूनी मामलों का निपटारा, दोनों ही निवेशकों की नजर में रहेंगे।
