CBDT का बड़ा ऐलान: अब विदेश की संपत्ति और कमाई भी AIS में होगी शामिल, टैक्सपेयर्स को बरतनी होगी सावधानी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
CBDT का बड़ा ऐलान: अब विदेश की संपत्ति और कमाई भी AIS में होगी शामिल, टैक्सपेयर्स को बरतनी होगी सावधानी

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम बदलाव किया है। अब से आपकी विदेश में मौजूद बैंक अकाउंट्स, निवेश और डिविडेंड (Dividend) की जानकारी भी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिखाई देगी। टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपनी विदेशी कमाई और निवेश का मिलान अपने टैक्स फाइलिंग से ज़रूर करें, ताकि किसी भी तरह की जांच से बचा जा सके।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए निर्देश जारी किया है कि अब से विदेश से होने वाली आय और संपत्ति का विवरण भी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में शामिल किया जाएगा। इस नए नियम के तहत, ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन (AEOI) फ्रेमवर्क के ज़रिए मिली विदेश के बैंक बैंलेंस, विदेशी इक्विटी निवेश और अंतरराष्ट्रीय डिविडेंड (Dividend) की जानकारी अब सीधे टैक्सपेयर के AIS में दिखेगी।

यह आदेश 8 जुलाई, 2026 को जारी किया गया था, और इसके अनुसार डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ इनकम-टैक्स (सिस्टम्स) को यह डेटा मिलते ही 90 दिनों के अंदर अपलोड करना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की ग्लोबल फाइनेंशियल जानकारी को एक ही जगह पर उपलब्ध कराना है। डोमेस्टिक और विदेशी, दोनों तरह के ट्रांजेक्शन्स को अगल-बगल दिखाकर, टैक्स डिपार्टमेंट ITR (Income Tax Return) में की गई घोषणाओं की सटीकता को बेहतर बनाना चाहता है और वेरिफिकेशन प्रोसेस को आसान बनाना चाहता है।

टैक्स फाइलिंग और डिस्क्लोजर पर असर

विदेश की वित्तीय जानकारी को AIS में शामिल करना पारदर्शिता की ओर एक बड़ा कदम है। विदेश में निवेश रखने वाले निवेशकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी टैक्स फाइलिंग में बताई गई जानकारी, टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा AIS में दर्ज की गई जानकारी से मेल खाती हो। AIS डेटा और ITR फाइलिंग के बीच कोई भी विसंगति या अस्पष्ट अंतर इनकम टैक्स अथॉरिटीज से पूछताछ या औपचारिक वेरिफिकेशन का कारण बन सकता है।

आम कंप्लायंस की चुनौतियों में गलत करेंसी एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल, विदेश में चुकाए गए टैक्स की गणना में त्रुटियां, और फॉरेन टैक्स क्रेडिट (Foreign Tax Credits) का ठीक से क्लेम न कर पाना शामिल है। एक आम समस्या यह भी है कि फॉर्म 67 को तय समय सीमा तक फाइल न करने पर अक्सर फॉरेन टैक्स क्रेडिट (Foreign Tax Credits) को अस्वीकार कर दिया जाता है। इस नए इंटीग्रेशन के साथ, टैक्स डिपार्टमेंट ऐसी विसंगतियों को आसानी से पकड़ सकेगा।

टैक्सपेयर्स को क्या ट्रैक करना चाहिए?

जिन टैक्सपेयर्स के पास विदेशी वित्तीय संपत्ति है, उन्हें नियमित रूप से अपने AIS पोर्टल की जांच करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दिखाई गई जानकारी उनके अपने रिकॉर्ड से मेल खाती है। चूँकि यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क से ली गई है, इसलिए इन रिकॉर्ड्स और बताई गई आय के बीच कोई भी महत्वपूर्ण अंतर होने पर उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। निवेशकों को विदेशी आय, डिविडेंड (Dividend) और संपत्ति के मूल्यों के सटीक रिकॉर्ड बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, और फॉरेन टैक्स क्रेडिट (Foreign Tax Credits) से संबंधित सभी ज़रूरी फॉर्म्स को तय समय-सीमा के अनुसार फाइल करना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि किसी भी तरह के जुर्माने या प्रोसेसिंग में देरी से बचा जा सके।

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