रिपोर्टिंग का मौजूदा झमेला
आज, स्टॉक ब्रोकर्स को कई तरह के जटिल रिपोर्टिंग नियमों का सामना करना पड़ता है। उन्हें अलग-अलग, कई लेयर्स वाले डॉक्यूमेंटेशन और रिपोर्टिंग सिस्टम से निपटना होता है। एक ज़रूरी फाइल है MG13, जिसका इस्तेमाल क्लाइंट-लेवल पर मार्जिन रिपोर्टिंग के लिए होता है। यह फाइल क्लाइंट के मार्जिन की देनदारियों और समय के साथ कलेक्ट किए गए मार्जिन को ट्रैक करती है।
कोलैटरल रिपोर्टिंग भी बढ़ाती है बोझ
मार्जिन रिपोर्टिंग के अलावा, ब्रोकर्स को क्लाइंट के कोलैटरल (collateral) के लिए भी अलग से डॉक्यूमेंटेशन संभालना पड़ता है। इसमें क्लाइंट की सिक्योरिटीज को गिरवी (pledging) रखने के लिए उनकी मंजूरी, कोलैटरल का मूल्य, उस पर लागू होने वाले 'हेयरकट' (haircuts) और उसके इस्तेमाल की जानकारी शामिल होती है। नियमों के मुताबिक, क्लाइंट का कोलैटरल सिर्फ उसी क्लाइंट की मार्जिन की ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके लिए कंप्लायंस साबित करने को पूरे ऑडिट ट्रेल्स की ज़रूरत पड़ती है।