Broadcasters का TRAI पर दबाव, 2019 NTO नियमों में बड़े बदलाव की मांग

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AuthorAditya Rao|Published at:
Broadcasters का TRAI पर दबाव, 2019 NTO नियमों में बड़े बदलाव की मांग

देश के ब्रॉडकास्टर्स ने TRAI से 2019 के न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) को बदलने की अपील की है। सेक्टर का कहना है कि पुराने नियमों के कारण **4 करोड़** से ज्यादा पे-टीवी सब्सक्राइबर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो गए हैं, जिससे बिजनेस मॉडल पर संकट गहरा गया है।

नियम बनाम हकीकत का अंतर

हाल ही में हुए FICCI Frames 2026 कॉन्फ्रेंस में Zee Entertainment, Bharti Airtel और JioStar जैसी दिग्गज कंपनियों ने TRAI के सामने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। ब्रॉडकास्टर्स का साफ मानना है कि 2019 का NTO फ्रेमवर्क आज के डिजिटल युग के अनुकूल नहीं रहा है। अब ये कंपनियां एक ऐसी पॉलिसी की मांग कर रही हैं जो 'टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल' हो और जिसमें फ्लेक्सिबिलिटी हो।

सब्सक्राइबर बेस में भारी गिरावट

आंकड़े चिंताजनक हैं। NTO लागू होने के बाद से टीवी इंडस्ट्री ने करीब 40 से 50 मिलियन पे-टीवी सब्सक्राइबर्स गंवा दिए हैं। समस्या यह है कि जहां टीवी चैनल्स पर पैकेजिंग और प्राइसिंग के कड़े सरकारी नियम लागू हैं, वहीं OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को काफी ज्यादा आजादी मिली हुई है। ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि यही 'असमान अवसर' (uneven playing field) उन्हें प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल रहा है।

निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?

कंपनियां अब भी हाई फिक्स्ड कॉस्ट के बोझ तले दबी हैं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) कर रही हैं। सरकार ने हालांकि 'Telecommunications (Television, Radio and Associated Services) Rules, 2026' का ड्राफ्ट पेश किया है, लेकिन इंडस्ट्री अभी भी सावधानी बरत रही है।

निवेशकों को अब TRAI की कंसल्टेशन प्रोसेस पर नजर रखनी चाहिए। अगर नियमों में ढील मिलती है, तो चैनल्स की प्राइसिंग और बंडलिंग में बदलाव आएगा, जिसका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। आने वाले समय में कंपनियों की अपनी स्ट्रेटेजी और मार्केट शेयर बचाने की क्षमता ही शेयरहोल्डर्स के लिए मुख्य मॉनिटरेबल होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.