30 सितंबर 2026 से Nifty 50 में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इंडेक्स रीशफलिंग के तहत BSE को शामिल किया जाएगा, जबकि Wipro को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस बदलाव से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की उम्मीद है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ताजा समीक्षा के बाद Nifty 50 इंडेक्स की तस्वीर बदलने वाली है। 30 सितंबर 2026 से IT दिग्गज Wipro की जगह BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) इंडेक्स का हिस्सा बन जाएगा। इस खबर के आते ही BSE के शेयरों में 1.6% की उछाल दिखी और यह ₹3,147.50 पर ट्रेड करने लगा, वहीं Wipro के शेयर में 2% तक की गिरावट के साथ यह ₹158.80 पर आ गया।
क्यों हुआ यह बदलाव?
इंडेक्स का यह बदलाव 'फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन' के आधार पर किया गया है। रिव्यू के आंकड़ों के मुताबिक, BSE का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैप ₹1,40,879 करोड़ रहा, जो कि Wipro के ₹55,930 करोड़ के मुकाबले काफी अधिक है। नियम के अनुसार, जब कोई कंपनी लिक्विडिटी के तय मानकों को पूरा नहीं कर पाती, तो उसे बाहर कर दिया जाता है।
Passive Funds का गणित
इंडेक्स के बदलते ही Passive Funds (जैसे ETF और इंडेक्स फंड्स) के लिए अपनी पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग करना अनिवार्य हो जाएगा। अनुमान है कि इस बदलाव के कारण BSE में $630 मिलियन का इनफ्लो आएगा, जबकि Wipro से करीब $152 मिलियन का आउटफ्लो देखने को मिल सकता है। ध्यान रहे, यह खरीदारी और बिकवाली किसी फंडामेंटल बदलाव के कारण नहीं, बल्कि इंडेक्स के नियमों का पालन करने के लिए हो रही है।
निवेशकों के लिए सलाह
लॉन्ग-टर्म निवेशकों को समझना चाहिए कि इंडेक्स में शामिल होना या बाहर होना कंपनी की सेहत का इकलौता पैमाना नहीं है। बाजार में फिलहाल जो हलचल दिख रही है, वह मुख्य रूप से 'मैकेनिकल सेलिंग' का दबाव है। Nifty 100 इंडेक्स में भी कई नाम शामिल हुए हैं, जिनमें Hitachi Energy India, Polycab India, Vedanta Aluminium Metal और Vodafone Idea जैसे नाम प्रमुख हैं। इन शेयरों में भी आने वाले दिनों में हलचल बनी रह सकती है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले कंपनी के क्वार्टरली नतीजों और बिजनेस ग्रोथ पर नजर रखना जरूरी है।
