BSE के CEO सुंदररमन राममूर्ति ने स्पष्ट किया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट या ट्रेड नहीं हो सकेगा। इस बयान के बाद BSE के शेयरों में **3.5%** की तेजी देखी गई है।
लिस्टिंग के नियम पर क्या है स्थिति?
BSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुंदररमन राममूर्ति ने मार्केट में चल रही अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि NSE अपने पब्लिक डेब्यू (IPO) के बाद खुद को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट या ट्रेड नहीं कर पाएगा। CEO ने याद दिलाया कि 2017 में जब BSE खुद पब्लिक हुआ था, तब रेगुलेटर ने हितों के टकराव (Conflict of interest) को रोकने के लिए इसे अनुमति नहीं दी थी। भारतीय रेगुलेटरी नियमों के अनुसार, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज एक साथ लिस्टिंग वेन्यू और इश्यूअर नहीं बन सकता।
BSE की मजबूत वित्तीय सेहत
NSE के IPO की चर्चा के बीच BSE का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर है। कंपनी सितंबर 2026 तक पूरी तरह से कर्ज-मुक्त (Debt-free) है और मजबूत कैश फ्लो बनाए हुए है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन 64% के प्रभावशाली स्तर पर रहे हैं, जो इसकी कार्यक्षमता को दर्शाता है। हालांकि, NSE का दबदबा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसका IPO सितंबर 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और चुनौतियां
IPO के अलावा BSE अपने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर भी बदलाव कर रहा है। अगस्त 2026 में लागू किए गए इस नए सिस्टम के कारण कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्मों की भागीदारी कम हुई है, जिससे स्टॉक में थोड़ी अस्थिरता (Volatility) देखी जा रही है। एक्सचेंज फिलहाल डीलर्स के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को सुधारने पर काम कर रहा है, जिसमें फ्यूचर और ऑप्शन एक्सपायरी को ऑक्शन सेशन से अलग करने पर भी विचार किया जा रहा है।
