BSE Share: लिक्विडिटी की चिंता और NSE की आहट से टूटा शेयर, **4%** की गिरावट

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AuthorMehul Desai|Published at:
BSE Share: लिक्विडिटी की चिंता और NSE की आहट से टूटा शेयर, **4%** की गिरावट

BSE के निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में कम लिक्विडिटी और NSE की संभावित लिस्टिंग की खबरों के चलते शेयर इंट्राडे हाई से **4%** फिसल गया है।

बाजार का मूड क्यों बिगड़ा?

2 सितंबर, 2026 को BSE के शेयरों में भारी दबाव देखा गया। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह 3 अगस्त, 2026 को लागू हुआ 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) है। एक्सचेंज मैनेजमेंट ने भी माना है कि इस नए फ्रेमवर्क के कारण बाजार में लिक्विडिटी कम हुई है। खास तौर पर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और प्रोप्राइटरी अकाउंट्स की सक्रियता घटने से टर्नओवर पर असर पड़ा है, जिससे कंपनी की फीस इनकम घटने का डर सता रहा है।

NSE की चुनौती का साया

निवेशकों के बीच इस बात की चर्चा गरम है कि क्या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जल्द ही अपनी लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है? अगर NSE अपने शेयर BSE प्लेटफॉर्म पर 'परमिटेड टू ट्रेड' कैटेगरी में लाता है, तो मार्केट डायनामिक्स पूरी तरह बदल सकते हैं। इस खबर ने सेंटीमेंट को और कमजोर कर दिया है।

ब्रोकरेज की चेतावनी (Analyst Outlook)

ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर अपना रुख सतर्क कर लिया है। PL Capital ने BSE का टारगेट प्राइस ₹4,850 से घटाकर ₹4,025 कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि कैश मार्केट वॉल्यूम में सुधार नहीं हुआ, तो फाइनेंशियल ईयर 2027 के मुनाफे में 1-2% की कमी आ सकती है।

इसके अलावा, हाल ही में बढ़े STT (Securities Transaction Tax) ने भी एक्सचेंज ऑपरेटरों की मुसीबत बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य हो पाएगा या दबाव बना रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.