NSE के **₹22,662 करोड़** के IPO के प्राइस बैंड की घोषणा के बाद BSE के शेयरों में बिकवाली देखी गई। शुक्रवार को BSE का शेयर गिरकर **₹3,193.20** पर बंद हुआ। निवेशकों को अब नए प्रतिस्पर्धी और 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) से लिक्विडिटी पर पड़ने वाले असर की चिंता है।
शुक्रवार को BSE के शेयरों में 3.4% की गिरावट देखी गई और यह इंट्राडे में ₹3,193.20 के स्तर तक लुढ़क गया। इस गिरावट की मुख्य वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए प्राइस बैंड का ऐलान है। ₹22,662 करोड़ का यह IPO 17 सितंबर, 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा, जिसने बाजार के दिग्गजों को सतर्क कर दिया है।
NSE IPO से बदलेंगे वैल्यूएशन के पैमाने
अब तक BSE का शेयर बाजार में 'स्कर्सिटी प्रीमियम' (Scarcity Premium) का फायदा उठा रहा था, क्योंकि यह एकमात्र लिस्टेड एक्सचेंज था। लेकिन NSE के आने से निवेशकों को तुलना के लिए एक नया बेंचमार्क मिल गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंस्टीट्यूशनल कैपिटल का रुख बड़े प्लेटफॉर्म यानी NSE की तरफ मुड़ सकता है, जिससे BSE के मौजूदा वैल्यूएशन पर दबाव दिख रहा है।
CAS और लिक्विडिटी की दोहरी मार
IPO के अलावा, 3 अगस्त, 2026 को लागू किए गए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल है। डेटा के मुताबिक, इस नए मैकेनिज्म के बाद हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की भागीदारी घटी है और डेरिवेटिव्स टर्नओवर में भी कमी आई है। चूंकि एक्सचेंज की कमाई का बड़ा हिस्सा ट्रांजेक्शन फीस से आता है, इसलिए गिरता वॉल्यूम सीधे मुनाफे पर चोट कर सकता है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों की नजर अब NSE के IPO पर मिलने वाले सब्सक्रिप्शन रिस्पॉन्स पर होगी। इसके साथ ही, यह देखना अहम होगा कि क्या रेगुलेटरी स्तर पर CAS में कोई बदलाव किए जाते हैं। आने वाली तिमाहियों में BSE की चुनौती अपने मार्केट शेयर को बचाने और फीस से होने वाली कमाई को स्थिर रखने की होगी।
