BSE Share Price: नए 'क्लोजिंग ऑक्शन' नियमों की मार, BSE के शेयरों में **3%** की गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BSE Share Price: नए 'क्लोजिंग ऑक्शन' नियमों की मार, BSE के शेयरों में **3%** की गिरावट

BSE के शेयरों में आज करीब **3%** की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि **3 अगस्त** को लागू हुए नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम पर बुरा असर पड़ रहा है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।

बाजार का नया नियम और निवेशकों की चिंता

2 सितंबर 2026 को BSE के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। इस गिरावट की मुख्य वजह SEBI द्वारा 3 अगस्त से लागू किया गया नया 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) है। इस सिस्टम को दिन के आखिरी ट्रेड के लिए बेहतर प्राइस डिस्कवरी के मकसद से लाया गया था, लेकिन फिलहाल यह ट्रेडर्स के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है।

क्यों घट रहा है वॉल्यूम?

नया सिस्टम 3:15 PM से 3:35 PM के बीच 20 मिनट की विंडो में काम करता है, जिसने पुरानी 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज' वाली प्रक्रिया को बदल दिया है। डेटा संकेत दे रहे हैं कि ऑक्शन पूल में पहले जैसी पार्टिसिपेशन नहीं दिख रही है। इसका सबसे बड़ा असर इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर पड़ा है, जो एक्सचेंज की ट्रांजेक्शन-बेस्ड कमाई का मुख्य जरिया है।

मुनाफे पर मंडराता खतरा

निवेशकों के लिए बड़ी चिंता यह है कि अगर ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहता है, तो इसका सीधा असर कंपनी के रेवेन्यू और मार्जिन पर पड़ेगा। ऑक्शन विंडो के दौरान बढ़ते वोलैटिलिटी (Volatility) के कारण हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और प्रॉपराइटरी अकाउंट्स भी दूरियां बना रहे हैं, जिससे मार्केट की लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है।

BSE मैनेजमेंट ने लिक्विडिटी से जुड़ी इन चुनौतियों को स्वीकार किया है और वे मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ चर्चा कर रहे हैं ताकि इस मैकेनिज्म को सुचारू बनाया जा सके। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या एक्सचेंज वॉल्यूम को बढ़ाने और वोलैटिलिटी को कम करने में सफल हो पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.