अक्टूबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार में डेरिवेटिव ट्रेडिंग का नया इतिहास रचा गया। ग्लोबल तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच BSE Sensex का डेली प्रीमियम टर्नओवर **53%** उछलकर **₹35,481 करोड़** हो गया है, क्योंकि निवेशक अपने रिस्क को मैनेज करने के लिए एक्टिव हो गए हैं।
अक्टूबर 2026 के दौरान भारतीय शेयर बाजार में भारी उठा-पटक देखने को मिली, जिसके चलते निवेशकों ने अपने रिस्क को कवर करने के लिए डेरिवेटिव्स में जमकर दांव लगाए। BSE Sensex का औसत डेली प्रीमियम टर्नओवर 53% बढ़कर ₹35,481 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी की गूंज National Stock Exchange (NSE) पर भी रही, जहां टर्नओवर ₹63,227 करोड़ दर्ज किया गया, जो मार्च 2026 के बाद का सबसे उच्चतम आंकड़ा है।\n\n### अस्थिरता का असली कारण\nबाजार की इस बेचैनी के पीछे वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, जो $100 प्रति बैरल के पार निकल गया है। इस दबाव के कारण इंडेक्स में तेज हलचल देखी गई। Sensex ने 1 अक्टूबर को 71,292.88 का 52-वीक लो (low) छुआ, लेकिन फिर करीब 5% की रिकवरी के साथ 19 अक्टूबर तक 74,849.75 के हाई (high) स्तर तक पहुंच गया।\n\n### एक्सचेंज के कारोबार पर असर\nबाजार में बढ़ती यह अनिश्चितता एक्सचेंज ऑपरेटरों के लिए वरदान साबित हो रही है। NSE की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 60% हिस्सा अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग से आता है, इसलिए बाजार की यह अस्थिरता एक्सचेंजों के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम को और बढ़ा रही है।\n\n### निवेशकों के लिए आगे क्या?
अब बाजार की निगाहें 3 नवंबर, 2026 को होने वाले US मिड-टर्म इलेक्शंस पर टिकी हैं। अमेरिकी चुनाव के नतीजों का असर ग्लोबल ट्रेड और विदेशी निवेश (FII) के फ्लो पर पड़ना तय है। फिलहाल, एनालिस्ट्स वेस्ट एशिया में तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यही फैक्टर कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
