सोमवार को BSE SME IPO इंडेक्स ने **116,204** का 52-वीक हाई टच किया है, जबकि सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई। मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी दिख रही है, लेकिन SME सेगमेंट की हायर वोलैटिलिटी और लिक्विडिटी रिस्क को नजरअंदाज न करें।
सोमवार, 7 सितंबर 2026 को BSE SME IPO इंडेक्स 116,204.81 के 52-वीक हाई पर पहुंच गया। जहां एक तरफ बेंचमार्क सेंसेक्स 0.6% नीचे लुढ़क गया, वहीं SME इंडेक्स ने बाजार के रुख के विपरीत जाकर शानदार प्रदर्शन किया। अप्रैल से अब तक यह इंडेक्स 57% की जबरदस्त छलांग लगा चुका है।
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर का बोलबाला
इस रैली के पीछे मुख्य हाथ मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट कंपनियों का है। Devson Catalyst इसमें प्रमुख है, जिसने Tata Steel और NMDC जैसे दिग्गजों से बड़े कमर्शियल ऑर्डर हासिल किए हैं। जुलाई में लिस्टिंग के बाद से ही कंपनी अपनी R&D क्षमताओं के दम पर रफ्तार पकड़े हुए है।
इसके अलावा, Systematic Industries भी रडार पर है। कंपनी बोर्ड मीटिंग में प्रिफरेंशियल शेयर इश्यू पर चर्चा करने वाली है और हाल ही में छत्तीसगढ़ में बड़ी Galvanized Iron वायर फैसिलिटी शुरू की है। इसके साथ ही Airflo Rail Technologies और Tipco Engineering जैसे स्टॉक्स भी रेलवे आधुनिकीकरण और मशीनरी निर्माण की बदौलत निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks & Monitorables)
SME स्टॉक्स में कमाई के मौके जितने बड़े हैं, जोखिम भी उतने ही गहरे हैं। इन शेयरों में लिक्विडिटी कम होती है, जिससे बाजार में तनाव के समय एग्जिट लेना मुश्किल हो सकता है और शेयर प्राइस पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, Devson Catalyst जैसी कंपनियों में 'क्लाइंट कंसंट्रेशन' का रिस्क है, यानी अगर कुछ बड़े ग्राहक ऑर्डर्स में देरी करते हैं, तो सीधे रेवेन्यू पर चोट पड़ेगी। साथ ही, Airflo Rail जैसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को 'वर्किंग कैपिटल' की जरूरत ज्यादा होती है। इनके 'डेटर डेज' (पैसा मिलने में देरी) कैश फ्लो पर दबाव डाल सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल तेजी देखकर न कूदें, बल्कि कंपनी के ऑर्डर बुक, कैश फ्लो स्टेटमेंट और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की टाइमलाइन पर बारीकी से नजर रखें।
