इंडेक्स कैसे काम करेंगे?
ये नए इंडेक्स हर महीने री-कॉन्स्टीट्यूट (reconstitute) किए जाएंगे, यानी इनमें बदलाव होंगे। इनका बेस वैल्यू 100 रखा गया है और पहली वैल्यू डेट 31 अगस्त, 2015 है। किस सिक्योरिटी को इंडेक्स में शामिल किया जाएगा, यह उसके टर्नओवर (turnover) और आउटस्टैंडिंग इश्यूएंस (outstanding issuance) यानी बाज़ार में कितनी मात्रा में वह उपलब्ध है, उसके आधार पर तय होगा।
स्पेसिफिक इंडेक्स की पहचान
- BSE 4-8 Year G-Sec Index: यह इंडेक्स उन तीन सबसे लिक्विड (liquid) गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के परफॉरमेंस पर नज़र रखेगा जिनकी मैच्योरिटी (maturity) 4 से 8 साल के बीच है। खास बात यह है कि इन सिक्योरिटीज का आउटस्टैंडिंग इश्यूएंस ₹7,500 करोड़ से ज़्यादा होना चाहिए।
- BSE 8-13 Year G-Sec Index: इसी तरह, यह इंडेक्स उन टॉप तीन लिक्विड गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को ट्रैक करेगा जिनकी रेसिडुअल मैच्योरिटी (residual maturity) 8 से 13 साल के बीच है। इनके लिए भी बाज़ार में ₹7,500 करोड़ से अधिक की इश्यूएंस ज़रूरी है।
पैसिव इन्वेस्टिंग और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट को सपोर्ट
BSE का मानना है कि ये नए बेंचमार्क पैसिव इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स (passive investment vehicles) जैसे एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और इंडेक्स फंड्स (index funds) के लिए काफी मददगार साबित होंगे। ये फंड्स इंडेक्स के परफॉरमेंस को कॉपी करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, एसेट मैनेजर्स (asset managers) इन इंडेक्स का इस्तेमाल पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अलग-अलग म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए बेंचमार्क के तौर पर कर पाएंगे। इससे गवर्नमेंट बॉन्ड सेगमेंट में फंड्स के परफॉरमेंस को स्टैंडर्ड तरीके से नापने में आसानी होगी।
मार्केट को मिलेगी नई गहराई
BSE Index Services Pvt Ltd द्वारा इन इंडेक्स को लॉन्च करना भारत के डेट मार्केट (debt market) की बेंचमार्किंग क्षमताओं को और गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन्वेस्टर्स को अब गवर्नमेंट बॉन्ड की अलग-अलग मैच्योरिटीज में मौजूद अवसरों की ज़्यादा बारीक जानकारी मिल सकेगी। इससे बेहतर डायवर्सिफिकेशन (diversification) और ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजीज़ (structured investment strategies) लागू करने में मदद मिलेगी, जो अंततः फिक्स्ड-इनकम मार्केट (fixed-income market) में ज़्यादा क्लैरिटी (clarity) और एफिशिएंसी (efficiency) लाएगी।