27 अगस्त 2026 को BSE के नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिली। इस दौरान Sensex में **2,000 अंकों** का स्विंग आया, जबकि Bankex के कुछ पुट ऑप्शंस की कीमतों में अजीबोगरीब उछाल दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के लिए लिक्विडिटी का बड़ा रिस्क खड़ा हो गया है।
बाजार में मची खलबली
BSE के नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के लागू होने के बाद से मार्केट में अनपेक्षित अस्थिरता देखी जा रही है। 27 अगस्त 2026 को मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स ने क्लोजिंग के आखिरी कुछ मिनटों में कीमतों में जबरदस्त झटके महसूस किए। अस्थिरता इतनी गंभीर थी कि एक Bankex पुट ऑप्शन का प्रीमियम, जो ₹6 पर ट्रेड कर रहा था, कुछ ही मिनटों में उछलकर ₹1,000 के स्तर पर पहुंच गया।
क्यों आई इतनी बड़ी दिक्कत?
यह नया सेशन 3 अगस्त 2026 को पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस की गणना के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया बनाना था। यह सेशन दोपहर 3:15 बजे से शुरू होकर 20 मिनट तक चलता है। हालांकि, मौजूदा डेटा और ट्रेड्स बताते हैं कि लिक्विडिटी की कमी के कारण यह विंडो पूरी तरह से संघर्ष कर रही है।
ऑर्डर बुक पतली होने की वजह से, सामान्य ऑर्डर भी बड़ी कीमतों में बदलाव (Price Distortions) पैदा कर रहे हैं। बाय और सेल ऑर्डर्स के बीच के इस बड़े गैप ने डेरिवेटिव्स प्रीमियम में हिंसक उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है।
Sensex पर असर और रिस्क
यह अस्थिरता केवल ऑप्शंस तक सीमित नहीं रही। BSE Sensex में मात्र 6 मिनट के भीतर 77,200 से गिरकर 74,983 तक का सफर तय करते हुए 2,000 अंकों से अधिक की भारी गिरावट देखी गई। जो ट्रेडर्स ऑटोमेटेड स्ट्रैटेजी या स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह मूवमेंट बेहद घातक साबित हुआ, क्योंकि गलत प्राइस पर ऑर्डर एग्जीक्यूट होने से बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
फिलहाल, 3:15 pm से 3:35 pm के बीच की इस विंडो में लिक्विडिटी की भारी कमी सबसे बड़ा रिस्क है। जब तक मार्केट की गहराई (Market Depth) नहीं बढ़ती, तब तक क्लोजिंग सेशन के दौरान ऐसे अचानक आए स्पाइक्स का खतरा बना रहेगा। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या एक्सचेंज लिक्विडिटी सुधारने के लिए कोई नया नियम लाएगा या फिर ऑर्डर साइज पर सख्त सीमाएं तय करेगा।
